Moscow: चीन के साथ अब रूस अपनी कार इंडस्ट्री को आगे बढ़ाएगा. रूस की कार इंडस्ट्री पर अब चीन की छाप भी दिख रही है. खुद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीनी तकनीक से बनी कार की टेस्ट ड्राइविंग की. ये ड्राइविंग निजनी नोवगोरोड के मशहूर गोर्की ऑटोमोटिव प्लांट का दौरे के बाद ली गई. सामने आए वीडियो में पुतिन कार की ड्राइविंग सीट पर बैठकर उसे चलाते दिख रहे हैं. आम रूसी ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि उन्हें जल्द ही चीनी डिजाइन और तकनीक वाली नई गाड़ियां अपने देश में बनी हुई मिलेंगी.
चीन के साथ बढ़ती आर्थिक साझीदारी
इसे रूस के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आ रहे बड़े बदलावों और चीन के साथ उसकी बढ़ती आर्थिक साझीदारी की एक खास तस्वीर पेश दिखाती है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और विदेशी कार कंपनियों के बाजार से बाहर होने के बाद रूस के ऑटोमोबाइल उद्योग को भारी झटके लगे थे. ऐसे समय में चीनी कंपनियों ने आगे बढ़कर इस खालीपन को भरने का काम किया है. अब रूसी फैक्ट्रियों को चीन की मदद से गाड़ियों के डिजाइन, जरूरी पार्ट्स और आधुनिक तकनीक आसानी से मिल रही है.
एक बड़ा और नया बाजार
इससे रूसी कारखाने दोबारा अपनी रफ्तार पकड़ रहे हैं. दूसरी तरफ, चीन को अपनी ऑटो तकनीक और गाड़ियों के लिए रूस के रूप में एक बड़ा और नया बाजार मिल गया है. रूस की औद्योगिक पहचान माने जाने वाले GAZ प्लांट में पुतिन का खुद स्टीयरिंग संभालना एक संदेश भी है. इससे वे देश की ऑटो इंडस्ट्री को एक नया भरोसा देता है. पश्चिमी ब्रांड्स से नाता टूट चुका है. रूस अब अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बचाने और रोजगार को बनाए रखने के लिए चीन के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है.
गाड़ियों की भविष्य में सफलता
पुतिन की यह टेस्ट ड्राइव दुनिया को यह संदेश देती है कि रूस अपनी अर्थव्यवस्था और कार उद्योग को नई दिशा में ले जाने के लिए तैयार है. भले ही इन गाड़ियों की भविष्य में सफलता इनकी मजबूती, सही कीमत और बाजार में मिलने वाले कलपुर्जों पर निर्भर करेगी. लेकिन निजनी नोवगोरोड की इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि रूस का ऑटो सेक्टर अब एक नई आर्थिक वास्तविकता और चीन के मजबूत साथ के दम पर आगे बढ़ रहा है.
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