होर्मुज संकट का असर: कच्चा तेल 100 डॉलर पार, 10% उछाल से बढ़ी चिंता

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे दाम फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. करीब 10 प्रतिशत की इस बढ़त ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यह तेजी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है.

वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. तेल की कीमतों में अचानक आई इस तेजी का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, शेयर बाजारों और आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जोरदार तेजी

सोमवार सुबह कारोबार के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 7 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई और यह 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. वहीं डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल में भी करीब 8 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई, जिससे इसकी कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी मुख्य रूप से आपूर्ति में संभावित बाधा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम है. निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने के कारण कीमतों में अचानक उछाल आया है.

घरेलू बाजार में भी असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर भारत के घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल के वायदा भाव में भी तेज बढ़त दर्ज की गई. 20 अप्रैल के अनुबंध में कीमत करीब 7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 9,850 रुपए तक पहुंच गई. अगर यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.

अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ा कारण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह जलमार्ग को सुरक्षित रखने में विफल रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को रोक सकता है. इस बयान के बाद वैश्विक बाजार में चिंता और बढ़ गई है. दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसका उद्देश्य तनाव कम करना और इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से खोलना था. लेकिन वार्ता विफल होने के बाद स्थिति फिर से गंभीर हो गई है और आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है.

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. दुनिया के कुल कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में अगर यहां किसी भी प्रकार की रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है.

शेयर बाजारों में गिरावट

तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक तनाव का असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला है. भारत में शुरुआती कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स व निफ्टी करीब 2 प्रतिशत नीचे आ गए. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जहां प्रमुख सूचकांकों में 1% से अधिक की गिरावट रही. निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है.

यह भी पढ़े: डिजिटल प्रचार ने बदला खेल! तिरुपुर के कपड़ा उद्योग में मंदी, टी-शर्ट-टोपी के ऑर्डर घटे

Latest News

स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास, रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ बनीं भारत की नंबर 1 खिलाड़ी, अब निशाने पर बाबर आजम

New Delhi: भारतीय महिला टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन में खेले गए पहले...

More Articles Like This

Exit mobile version