मछुआरों को ज्यादा कीमत वाले मछली संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करेगी केंद्र सरकार

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Deep Sea Fishing: सरकार गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने के लिए मछुआरों को ज्यादा कीमत वाली मछली की प्रजातियों को पकड़ने के लिए आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इसी दिशा में गुजरात के गांधीनगर में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी. इसमें एक्सेस पास और लेटर ऑफ ऑथराइजेशन रखने वाले लोगों के साथ भी चर्चा की जाएगी. इस कार्यशाला को भारत में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है. इसमें नीति-निर्माताओं के साथ तकनीकी विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सहकारी समितियां और मछुआरे शामिल होंगे. सभी पक्ष गहरे समुद्र में मछली पकड़ने से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

जमीनी चुनौतियों पर होगी चर्चा

गुजरात में गुरुवार को होने वाला यह कार्यक्रम मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान आने वाली जमीनी चुनौतियों को सामने रखने का अवसर देगा. इसके साथ ही संबंधित पक्षों से इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए सुझाव भी लिए जाएंगे. बयान के मुताबिक, कार्यशाला में होने वाली चर्चाओं और सामने आने वाले सुझावों के जरिए जमीनी स्तर की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा तकनीक, कौशल, वित्तीय सुविधाओं और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने तथा गहरे समुद्र में मछुआरों की भागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा होगी. इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य लोग शामिल होंगे.

भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र में बड़ी क्षमता

यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित की जा रही है, जब भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में समुद्री मछली पकड़ने की क्षमता का अनुमान 58.6 लाख मीट्रिक टन लगाया गया है. इस क्षेत्र से करीब 50 लाख मछुआरों की आजीविका जुड़ी हुई है. समुद्री मत्स्य क्षेत्र खाद्य सुरक्षा और पोषण के साथ-साथ रोजगार, आय सृजन और निर्यात से होने वाली कमाई में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है. भारत दुनिया के प्रमुख मछली और एक्वाकल्चर उत्पादक देशों में शामिल है. FY25-26 में देश ने करीब 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री भोजन का निर्यात किया.

टूना जैसी ज्यादा कीमत वाली प्रजातियों पर नजर

देश में मछली पकड़ने की अधिकांश गतिविधियां तट से 40-50 नॉटिकल मील के दायरे में होती हैं. वहीं गहरे पानी और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के इलाकों में ज्यादा कीमत वाली मछली प्रजातियों को पकड़ने के अवसर मौजूद हैं. इनमें खास तौर पर टूना और टूना जैसी प्रजातियां शामिल हैं.

सहकारी समितियों और डिजिटलाइजेशन पर जोर

मत्स्य पालन विभाग ने मछली पालन करने वाले किसानों के उत्पादक संगठनों और मछली पालन से जुड़ी सहकारी समितियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया है. इसके साथ ही विभिन्न पहलों के माध्यम से मछली पालन क्षेत्र के डिजिटलाइजेशन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

कार्यशाला में इन मुद्दों पर होंगे तकनीकी सत्र

कार्यशाला में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन पर केंद्रित तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. इनमें मत्स्य संसाधनों की क्षमता, जहाजों का आधुनिकीकरण, कौशल विकास, वित्तीय सहायता, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात बाजारों तक पहुंच जैसे विषय शामिल होंगे.

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