पेट्रोल में बड़ा बदलाव! E100 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी, अब पूरी तरह एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां?

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Ethanol blending India: क्या आने वाले समय में आपकी गाड़ी पेट्रोल नहीं, बल्कि एथेनॉल से चलेगी? केंद्र सरकार के नए कदम ने इस सवाल को हकीकत के बेहद करीब ला दिया है. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार अब ईंधन नीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है.

अगर यह ड्राफ्ट लागू होता है, तो भारत में फ्यूल सिस्टम ही बदल सकता है—जहां गाड़ियां हाई एथेनॉल या पूरी तरह एथेनॉल पर भी दौड़ती नजर आएंगी. यह बदलाव न सिर्फ आपकी जेब, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भी बड़ा असर डाल सकता है.

मंत्रालय का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 27 अप्रैल को मोटर वाहन अधिनियम के तहत यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें उत्सर्जन मानकों और ईंधन वर्गीकरण में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है. अब तक पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग की सीमा E85 तक थी, लेकिन नए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर E100 तक करने की बात कही गई है. इसके साथ ही बायोडीजल B100 के लिए भी प्रावधान जोड़े गए हैं, जो वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है.

ब्लेंडिंग की सीमा में लगातार बढ़ोतरी

भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया है. पहले पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा E10 तक सीमित थी, जिसे बाद में बढ़ाकर E20 किया गया. अब सरकार इससे आगे बढ़ते हुए हाई-ब्लेंड फ्यूल को समर्थन देने की दिशा में काम कर रही है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को कम करना और घरेलू ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देना है.

आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे

पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने से कच्चे तेल की मांग में कमी आएगी. इससे देश को विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आयात बिल घटेगा. साथ ही प्रदूषण में कमी आने से पर्यावरण को भी फायदा होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बताया था कि 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल पेट्रोल आयात कम हो रहा है. यह आंकड़ा इस नीति के बड़े आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है.

गाड़ियों में बदलाव जरूरी

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो वाहन उद्योग में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. गाड़ियों को हाई एथेनॉल ब्लेंड (E85 या E100) पर चलाने के लिए तकनीकी रूप से अनुकूल बनाना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव धीरे-धीरे लागू होगा, ताकि उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों को नए ईंधन के अनुरूप ढलने का समय मिल सके.

नितिन गडकरी का बड़ा बयान

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि भविष्य में पेट्रोल-डीजल पर चलने वाली गाड़ियों का कोई भविष्य नहीं है. उन्होंने वाहन निर्माताओं से अपील की कि वे जल्द से जल्द बायोफ्यूल और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ें.

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