EV Sales Boom: महंगे पेट्रोल-डीजल से बढ़ा इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज, मई में EV बिक्री ने पकड़ी रफ्तार

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब ऑटोमोबाइल बाजार में साफ दिखाई देने लगा है. ईंधन पर बढ़ते खर्च से बचने के लिए लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि मई 2026 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण और बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नोमुरा और एचएसबीसी की रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रिक कारों और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों दोनों की मांग में तेज वृद्धि देखने को मिली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच उपभोक्ता अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जो लंबे समय में उनकी जेब पर कम बोझ डालें. इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

मई में बढ़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी

नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री का 6.4% रही, जबकि FY26 में यह आंकड़ा 4 प्रतिशत था. वहीं इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 8.9% दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के लगभग 6.5% से अधिक है. ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि यह आंकड़े इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में तेजी से हो रही वृद्धि को दर्शाते हैं. वहीं एचएसबीसी की रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 9.3 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.

ईंधन की बढ़ती कीमतों का दिख रहा असर

एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों का रुझान इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा है. पेट्रोल और डीजल के बढ़ते खर्च के बीच कई उपभोक्ता अब इलेक्ट्रिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बदलाव केवल चार पहिया वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोपहिया वाहन बाजार में भी तेजी से दिखाई दे रहा है.

टाटा मोटर्स को मिला सबसे ज्यादा फायदा

इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा टाटा मोटर्स को हुआ है. कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो महीनों में कंपनी की इलेक्ट्रिक वाहनों की बुकिंग 2.5 गुना बढ़ गई है. खासकर 15 लाख रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में मजबूत मांग देखने को मिल रही है. बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता 10,000 यूनिट प्रति माह से बढ़ाकर 15,000 यूनिट प्रति माह करने की योजना बना रही है.

इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में TVS बनी नंबर-1

दोपहिया वाहन सेगमेंट में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. मई महीने में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटरों के पंजीकरण के साथ TVS Motor बाजार में अग्रणी रही. इसके बाद बजाज ऑटो और एथर एनर्जी का स्थान रहा. नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक एथर की बिक्री में साल-दर-साल दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे कंपनी को 16.5 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिली.

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी बनी बड़ी वजह

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो सप्ताह के भीतर करीब 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी. वहीं भारतीय क्रूड बास्केट मई महीने में लगातार तीसरे महीने 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही. मध्य पूर्व में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाए रखा. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का पारगमन इसी मार्ग से होता है.

भारतीय EV बाजार एक अहम मोड़ पर

नोमुरा का मानना है कि अनुकूल नीतिगत उपायों और बढ़ती उपभोक्ता स्वीकृति के कारण भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है. हालांकि बढ़ती कमोडिटी लागत अभी भी वाहन निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. इसके बावजूद मौजूदा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और तेजी से बढ़ सकती है, जिससे ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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