Foodgrain Production: देश में खाद्यान्न उत्पादन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यह पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन उत्पादन के मुकाबले करीब 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत अधिक है. यह जानकारी गुरुवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई.
80 करोड़ लोगों तक पहुंचता है खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम
भारत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक चला रहा है. इसके दायरे में करीब 80 करोड़ लोग आते हैं. खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ देश में खाद्यान्न के भंडारण और वितरण से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है.
विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना से बढ़ी PACS की भूमिका
आधिकारिक फैक्टशीट में कहा गया है, “भारत में कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों के विस्तार के साथ देशभर में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढांचे का महत्व बढ़ गया है. सहकारी क्षेत्र में 2023 में शुरू की गई विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद की है.” इस योजना को संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तंत्र के जरिए समर्थन दिया जा रहा है.
11 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट से हुई शुरुआत
यह पहल 11 राज्यों में पायलट परियोजनाओं के साथ शुरू की गई थी. फैक्टशीट के अनुसार, इन परियोजनाओं के तहत 9,750 मिलियन टन भंडारण क्षमता से जुड़ी पहल शुरू हुई और योजना लगातार विस्तार कर रही है. जुलाई 2026 तक देशभर में 313 पीएसीएस में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था. इससे 1.80 लाख टन (एलएमटी) से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है. इस पूरी व्यवस्था में गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और संचालन की व्यवहार्यता पर भी विशेष जोर दिया गया है.
किसानों को क्या फायदा होगा?
सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना का उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी को कम करना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है. इसके साथ ही किसानों को संकट के समय अपनी उपज बेचने से बचने और बेहतर कीमत हासिल करने के लिए ज्यादा लचीलापन देने पर भी जोर है. योजना के जरिए खरीद केंद्रों, गोदामों और उचित मूल्य दुकानों के बीच परिवहन लागत को कम करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा कृषि गतिविधियों में विविधता लाकर प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS की भूमिका को भी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. यह योजना किसानों के लिए अधिक आय के अवसर पैदा करने में भी मदद करेगी.
इन 11 राज्यों में लागू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के पायलट प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा में लागू किया गया. फैक्टशीट के मुताबिक, इन पायलट परियोजनाओं ने महत्वपूर्ण परिचालन आधार तैयार किया है. साथ ही, सहकारी स्तर पर स्थानीय भंडारण ढांचे की व्यवहार्यता को भी प्रदर्शित किया है.
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