S Jaishankar: लंबे समय से रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को खत्म कराने की कोशिशों में भारत अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कीव में कहा कि अगर भारत किसी भी तरह से शांति कायम करने में मदद कर सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है. जरूरत पड़ने पर भारत मध्यस्थता की भूमिका भी निभा सकता है.
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ बातचीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘अगर भारत किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो हम मौजूद हैं.’ भारत शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन जंग का हल बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की वकालत करता रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर निकलना चाहिए. 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में हुए SCO समिट में पीएम मोदी ने युद्ध और वैश्विक संघर्षों को लेकर काफी स्पष्ट संदेश दिया था. उन्होंने कहा कि सभी तनाव और संघर्षों का समाधान जंग के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए.
इससे एक दिन पहले 31 अगस्त को व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान भी मोदी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर कहा था, ‘हमें अंतहीन युद्ध से निकलकर युद्ध की समाप्ति और युद्धविराम की दिशा में बढ़ना होगा.’ उन्होंने कहा कि भारत हर शांति प्रयास का समर्थन करता है. उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को एक कदम पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम पूरी मानवता के लिए नई उम्मीद पैदा करता है.
यस जयशंकर और यूक्रेनी विदेश मंत्री के बीच बातचीत में काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठा. दोनों नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि जंग का असर सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है.
विदेश मंत्री जयशंकर इस समय यूक्रेन के दौरे पर हैं. इस दौरान विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का मुख्य मकसद भारत और यूक्रेन के रिश्तों को और मजबूत करना है. इसके अलावा, दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय हालात और आपसी हित से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी. जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर में हालिया तनाव बढ़ा है.