Xi Jinping US Visit: चीन और अमेरिका के बीच रिश्तों में तनाव के बाद भी 24 सितंबर को वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मीटिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने साथ बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल संग पहुंच सकते हैं. ऐसे वक्त में जब अमेरिका चीनी कंपनियों पर लगातार शिकंजा कस रहा है, चीन का यह कदम ट्रंप के लिए एक बड़ा संदेश होगा. यह इसलिए भी खास है क्योंकि शी आमतौर पर विदेश यात्राओं में बड़ी संख्या में निजी कंपनियों के प्रमुखों को साथ नहीं ले जाते. ट्रंप भी अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान कारोबारियों के साथ चीन पहुंचे थे. यह उसी कदम को दोहराने जैसा होगा.
Xi Jinping US Visit
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मिली जानकारी के मुताबिक, शी जिनपिंग के साथ जाने वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से उद्योगपति शामिल होंगे, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन चीनी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका जाता है, तो यह करीब एक दशक बाद बड़ा बदलाव होगा. इससे पहले शी जिनपिंग साल 2015 में अमेरिका की यात्रा पर बड़े कारोबारी दल के साथ गए थे. उस वक्त अलीबाबा के संस्थापक जैक मा, टेनसेंट के संस्थापक पोनी मा और चीनी बैंकों व सरकारी कंपनियों के अधिकारी उनके साथ थे. उस दौरान चीन ने बोइंग के साथ 300 विमानों का करीब 38 अरब डॉलर का समझौता किया था. शी ने उस समय एप्पल के टिम कुक, मेटा के मार्क जुकरबर्ग और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस समेत अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों से भी मुलाकात की थी.
दरअसल, साल 2020 से चीन में टेक्नोलॉजी, शिक्षा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर रेगुलेटरी सख्ती बढ़ी. इसके बाद कई निजी कारोबारी समूहों और चीनी सरकार के बीच रिश्तों में भी तनाव की चर्चा रही. ऐसे में शी जिनपिंग का बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल को साथ लाना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. दूसरी ओर अमेरिका भी चीनी कंपनियों और उनके निवेश को लेकर ज्यादा सतर्क है.
अमेरिका ने चीन से आने वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया है. ड्रोन, राउटर और रोबोट के कुछ विदेशी आयात पर भी रोक लगाई गई है. इसके अलावा टिकटॉक के अमेरिकी कारोबार को लेकर भी सख्त कदम उठाया गया. कई बड़ी चीनी टेक्नोलॉजी कंपनियों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी लिस्ट में भी रखा गया है.