AI से हेल्थकेयर में बड़ा बदलाव, अरबों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में निभाएगा अहम भूमिका

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

एआई का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी मदद करना है. एआई तकनीक चिकित्सकों का समय बचाकर उन्हें बेहतर तरीके से सोचने और मरीजों की देखभाल पर अधिक ध्यान देने का अवसर देती है. दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में उद्योग जगत के नेताओं ने यह बात कही. समिट के दौरान फिलिप्स के सीईओ रॉय जैकब्स ने बताया कि हेल्थकेयर क्षेत्र में एआई का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई दे सकता है. उनके अनुसार, एआई पहले से ही अत्यधिक दबाव झेल रहे स्वास्थ्य सिस्टम का बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

अरबों जिंदगियों को बदलने की क्षमता

जब हम अब से एक दशक बाद पीछे मुड़कर देखेंगे, तो हेल्थकेयर में एआई को स्क्रीन पर ऑप्टिमाइज़ की गई चीज़ों के लिए याद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन अरबों जिंदगियों के लिए याद किया जाएगा जिन्हें इसने बेहतर बनाने में मदद की. मेटा के चीफ एआई ऑफिसर अलेक्जेंडर वैंग ने रोज़मर्रा की जिंदगी में एआई के बढ़ते एकीकरण और इसके रास्ते को बनाने में भारत की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया.

पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस का विजन

उन्होंने कहा, “हमारा विज़न पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस है, जो आपको, आपके लक्ष्यों, आपकी रुचियों को जानता है. इसके साथ ही आप जिस भी काम पर फोकस कर रहे हैं, उसमें आपकी मदद करता है. यह आपकी सेवा करता है, आप कोई भी हों, कहीं भी हों.” मेटा के चीफ एआई ऑफिसर ने आगे कहा, आपका पर्सनल एआई आपको कितनी अच्छी तरह जानता है? अगर हम इसे जिम्मेदारी से नहीं कर रहे हैं, तो लोग हमें काम पर नहीं रखेंगे. भरोसा, ट्रांसपेरेंसी और गवर्नेंस को मॉडल्स की तरह ही तेज़ी से आगे बढ़ना चाहिए.

एआई अपनाने की सबसे बड़ी चुनौती

किंड्रिल के चेयरमैन और सीईओ मार्टिन श्रोएटर ने कहा, “इनोवेशन असली है. चुनौती तैयारी की है. एआई आज भी इंडस्ट्रियलाइज्ड नहीं है, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा, ऑपरेशन्स और लोगों को इसे बड़े पैमाने पर सपोर्ट करने के लिए तैयार रहना चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, “एआई का भविष्य रिसर्च लैब्स या बोर्डरूम में तय नहीं होगा. यह इस बात से तय होगा कि यह उन सिस्टम्स में कितने भरोसे और ज़िम्मेदारी से जुड़ा है जिन पर समाज हर दिन निर्भर करता है.”

एआई और वैश्विक ऊर्जा दबाव

श्नाइडर इलेक्ट्रिक के ग्लोबल सीईओ ओलिवियर ब्लम ने एआई और वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के बीच मजबूत संबंध को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते उपयोग का मतलब अधिक कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता है, और ज्यादा कंप्यूटिंग का अर्थ है अधिक ऊर्जा खपत. इसलिए वैश्विक ऊर्जा तंत्र पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि एआई ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए सकारात्मक बदलाव लाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है.

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