भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) दिसंबर 2025 तक सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 130 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई. डेटा और टेक्नोलॉजी कंपनी एक्सपीरियन के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में नए लोन की क्रेडिट सोर्सिंग में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत बढ़ी, जबकि उससे एक साल पहले यह वृद्धि केवल 7 प्रतिशत थी.
लोन मांग और एसेट्स गुणवत्ता में सुधार
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उपभोक्ताओं और व्यवसायों से लोन की निरंतर मांग के कारण ऐसा हुआ. रिपोर्ट में लोन देने की गतिविधियों में मजबूत वृद्धि के बारे में बताया गया, जिसका मुख्य कारण लोन के स्रोतों में तेज वृद्धि, सिक्योर्ड लोन में बढ़ोतरी और एसेट्स गुणवत्ता में सुधार था. रिपोर्ट के अनुसार, एसेट्स गुणवत्ता में सकारात्मक संकेत मिले हैं और 30 दिन या उससे अधिक समय से लंबित भुगतानों की हिस्सेदारी वार्षिक आधार पर 3.9% से घटकर 3.3% हो गई है.
सिक्योर्ड लोन में तेज उछाल, गोल्ड लोन बना प्रमुख कारक
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सोना, आवास और वाहन ऋण जैसे सिक्योर्ड लोन में तेज वृद्धि दर्ज की गई. इन ऋणों में वृद्धि दर पिछले वर्ष के 20% के मुकाबले बढ़कर 42% तक पहुंच गई. खासतौर पर 3 लाख रुपये से कम की श्रेणी वाले छोटे गोल्ड लोन इस वृद्धि के प्रमुख कारक बने. यह रुझान दर्शाता है कि उधारकर्ता अब एसेट-आधारित सुरक्षित ऋण को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं वित्तीय संस्थान भी कम जोखिम वाले लोन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
होम और ऑटो लोन में स्थिर बढ़त, कार्ड जारी करने में सुस्ती
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लगातार बनी हुई मांग और बढ़ती वित्तीय क्षमता के कारण होम लोन और वाहन लोन में स्थिर वृद्धि देखी गई. वहीं त्योहारों के दौरान खरीदारी बढ़ने से पर्सनल लोन और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) के लिए ऋण की मांग में भी इजाफा हुआ. हालांकि क्रेडिट कार्ड जारी करने की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही, जो इस क्षेत्र में उधार देने और लेने दोनों पक्षों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है.
क्रेडिट इकोसिस्टम में मजबूत रुझान: एक्सपीरियन
एक्सपीरियन इंडिया के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष जैन ने कहा, “भारत का क्रेडिट इकोसिस्टम स्थिर मांग, सुरक्षित लोन के प्रति बढ़ती प्राथमिकता और बेहतर पुनर्भुगतान व्यवहार के कारण मजबूत गति दिखा रहा है. गोल्ड लोन और होम लोन जैसे उत्पाद उधारकर्ताओं को उनकी वित्तीय जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा करने में तेजी से मदद कर रहे हैं.” उन्होंने आगे बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने होम लोन और ऑटो लोन में अपनी उपस्थिति मजबूत की है, जबकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट्स के लिए लोन और दोपहिया वाहन लोन जैसे खुदरा केंद्रित क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई हैं.