भारत का डेटा सेंटर बाजार अब तेजी से विस्तार की राह पर है और आने वाले वर्षों में इसमें जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. सोमवार को जारी एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश का डेटा सेंटर बाजार 2025 के लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 22 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. यह वृद्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे निवेशकों का बढ़ता भरोसा, डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव हैं. भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसने इस सेक्टर को नई दिशा दे दी है.
एशिया-प्रशांत में उभरता मजबूत डेटा हब
Vestian की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक रणनीतिक डेटा सेंटर केंद्र के रूप में उभर रहा है. डिजिटल परिवर्तन की रफ्तार तेज होने के कारण कंपनियां अपने डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं. इससे भारत में डेटा सेंटर की मांग लगातार बढ़ रही है और यह क्षेत्र भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है.
क्षमता में तेज विस्तार, निवेश का बड़ा सहारा
रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 30 अरब डॉलर के निवेश के समर्थन से देश की डेटा सेंटर क्षमता 2026 के अंत तक 1.7 से 2.0 गीगावॉट तक पहुंच सकती है. इसके बाद यह क्षमता 2030 तक बढ़कर 4 से 5 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है. यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में भारत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ी ताकत बन सकता है.
डिजिटल अर्थव्यवस्था और इंटरनेट उपयोग बढ़ा रहे मांग
भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसके साथ ही ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन सेवाओं और क्लाउड आधारित तकनीकों का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है. इन सभी कारणों से डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे डेटा सेंटर की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है. Srinivas Rao के अनुसार, मजबूत नीतिगत समर्थन और बढ़ती डिजिटल मांग भारत को डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है.
लागत में बढ़त, निवेशकों के लिए बड़ा अवसर
भारत डेटा सेंटर निर्माण लागत के मामले में भी अन्य देशों से आगे है. यहां निर्माण लागत लगभग 6 से 7 मिलियन डॉलर प्रति मेगावाट है, जो सिंगापुर और जापान जैसे विकसित बाजारों की तुलना में काफी कम है. यही कारण है कि वैश्विक निवेशक भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं. 2020 से 2024 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 13 से 15 अरब डॉलर का निवेश आया, जिसमें विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत रही.
देश के बड़े शहर बन रहे डेटा हब
भारत में डेटा सेंटर का विकास फिलहाल कुछ प्रमुख शहरों में केंद्रित है, लेकिन धीरे-धीरे इसका विस्तार अन्य शहरों तक भी हो रहा है.
- Mumbai देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर केंद्र बना हुआ है
- Chennai वैश्विक डेटा गेटवे के रूप में उभर रहा है, जहां समुद्री केबल कनेक्टिविटी मजबूत है
- Hyderabad, Bengaluru और Pune मजबूत द्वितीयक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं
इसके अलावा Ahmedabad, Kochi, Jaipur और Visakhapatnam जैसे शहर भी तेजी से उभर रहे हैं.
यह भी पढ़े: West Bengal: बीरभूम में बोले अमित शाह, बंगाल की जनता ने दीदी को टाटा-बाय-बाय कहने का ले लिया है निर्णय

