India Economy Outlook: वैश्विक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ 6.7% रहने का अनुमान है, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है.
सोमवार को जारी CareEdge Ratings की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है और यही कारण है कि वैश्विक दबावों के बावजूद विकास दर को समर्थन मिल रहा है.
पश्चिम एशिया तनाव का असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत के लिए कुछ चुनौतियां जरूर पैदा कर सकता है. इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आएगा. विश्लेषण के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति, राजकोषीय संतुलन और बाह्य खातों पर दबाव डाल सकती हैं. हालांकि, इसके बावजूद भारत की आर्थिक नींव इतनी मजबूत है कि ग्रोथ पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है.
तेल की कीमतें और ग्रोथ अनुमान
रिपोर्ट में बेस केस सिनेरियो के तहत कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल मानी गई है. इस आधार पर अनुमान लगाया गया है कि भारत की ग्रोथ पहले के 7.2 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ी कम होकर 6.7 प्रतिशत रह सकती है.
महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर नियंत्रण में रहने की संभावना है. अनुमान है कि यह 4.5 प्रतिशत से 4.7 प्रतिशत के बीच रह सकती है. केयरएज रेटिंग्स का मानना है कि सरकार वैश्विक तेल कीमतों के असर को घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित रखने के लिए कदम उठाएगी. हालांकि, अगर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो समय के साथ महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
राजकोषीय स्थिति पर हल्का दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर संभावित उत्पाद शुल्क में कटौती, सब्सिडी की बढ़ती जरूरत और कर राजस्व में मामूली कमी के कारण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है. इसका असर GDP के लगभग 0.5 प्रतिशत तक हो सकता है, जिसे भारत की अर्थव्यवस्था के लिहाज से प्रबंधनीय माना गया है.
बॉन्ड यील्ड और बाजार संकेत
महंगाई और राजकोषीय दबाव के चलते सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी हल्की बढ़ोतरी का अनुमान है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्ड औसतन 6.8 प्रतिशत से 6.9 प्रतिशत के बीच रह सकती है.
चालू खाता घाटा और रुपया
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेल आयात बिल में बढ़ोतरी और निर्यात तथा प्रेषण पर दबाव के चलते चालू खाता घाटा GDP के लगभग 2.1% तक पहुंच सकता है. साथ ही, भारतीय रुपये की विनिमय दर औसतन 92 से 93 प्रति डॉलर के बीच रहने का अनुमान जताया गया है.
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