भारत का सर्विस सेक्टर मजबूत, मार्च में PMI 57.5 पर पहुंचा, घरेलू मांग में नरमी

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत की सेवा अर्थव्यवस्था ने मार्च महीने में मजबूती के संकेत दिए हैं. अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स में बढ़ोतरी के चलते सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में विस्तार देखने को मिला, हालांकि घरेलू मांग की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है. सोमवार को जारी S&P Global द्वारा संकलित HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत का सर्विसेज PMI 57.5 दर्ज किया गया. यह आंकड़ा दीर्घकालिक औसत 54.4 से काफी ऊपर है, जो सेक्टर में लगातार विस्तार को दर्शाता है.

इंटरनेशनल ऑर्डर्स ने दी मजबूती

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक मांग में तेजी ने भारतीय सर्विस सेक्टर को मजबूती दी. अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स लगभग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, जिससे कुल गतिविधियों को सपोर्ट मिला.

हालांकि, घरेलू स्तर पर नए कारोबार की वृद्धि में नरमी देखने को मिली. इसके बावजूद कंपनियों का आत्मविश्वास मजबूत बना हुआ है, जो भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद दिखाता है.

रोजगार में तेज बढ़ोतरी

मार्च के दौरान कंपनियों ने रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक रुख दिखाया. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मध्य के बाद से यह सबसे तेज भर्ती वृद्धि रही. कंपनियां बढ़ती मांग को देखते हुए अपने वर्कफोर्स का विस्तार कर रही हैं. साथ ही, उत्पादन को लेकर करीब 12 वर्षों में सबसे मजबूत दृष्टिकोण सामने आया है.

मध्य पूर्व तनाव का असर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर मांग और बाजार की स्थिति पर पड़ा है. पर्यटन सेक्टर पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिला, जिससे कुल उत्पादन की रफ्तार सीमित रही. यानी जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स बढ़े, वहीं वैश्विक अस्थिरता ने कुछ हद तक ग्रोथ को प्रभावित भी किया.

घरेलू मांग में नरमी, सेक्टरों में धीमी रफ्तार

सर्विस इकोनॉमी के चार प्रमुख क्षेत्रों में से तीन में बिक्री की वृद्धि धीमी रही. इनमें शामिल हैं:

  • वित्त और बीमा
  • रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाएं
  • ट्रांसपोर्ट, सूचना और संचार

मार्च में सेवा क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि दर पिछले 14 महीनों में सबसे धीमी रही. इसका मुख्य कारण नए घरेलू ऑर्डर्स में आई सुस्ती बताया गया है.

महंगाई का दबाव बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2022 के बाद पहली बार इनपुट लागत में इतनी तेज वृद्धि देखी गई. इसके चलते सर्विस सेक्टर में कीमतों पर दबाव बढ़ा. मार्च में सेवाओं की कीमतों में सात महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो दीर्घकालिक औसत से भी ऊपर रही.

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