Business News: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और कई क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत के निर्यात क्षेत्र से उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं. देश के वस्तु निर्यात में मई 2026 के दौरान मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 18% बढ़कर 45.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है. इसके बावजूद भारतीय निर्यातकों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है.
मई में 45.2 अरब डॉलर रहा वस्तु निर्यात
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, मई 2026 में भारत का वस्तु निर्यात बढ़कर 45.2 अरब डॉलर हो गया. इससे पहले अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा 43.56 अरब डॉलर दर्ज किया गया था. वहीं, अप्रैल 2025 में वस्तु निर्यात 38.28 अरब डॉलर था. इस तुलना से स्पष्ट है कि भारत के निर्यात क्षेत्र में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है.
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों यानी अप्रैल और मई के दौरान भारत का कुल वस्तु निर्यात 88.91 अरब डॉलर दर्ज किया गया. यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16.09 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. शुरुआती दो महीनों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि चालू वित्त वर्ष में निर्यात क्षेत्र मजबूत गति के साथ आगे बढ़ रहा है.
वाणिज्य सचिव ने बताई बड़ी उपलब्धि
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मई की निर्यात वृद्धि को अब तक दर्ज की गई सबसे ऊंची वृद्धि दरों में से एक बताया. अग्रवाल ने कहा, “अगर हम इसी रफ्तार को बनाए रखते हैं, तो वित्त वर्ष 27 व्यापार के लिहाज से एक अच्छा साल होगा.” उन्होंने कहा कि भारत ने अप्रैल और मई दोनों महीनों में निर्यात में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि इसी अवधि में आयात में भी तेज वृद्धि देखने को मिली है.
मई 2026 के दौरान देश का आयात भी तेजी से बढ़ा है. आंकड़ों के अनुसार, मई में आयात 20.62 प्रतिशत बढ़कर 73.41 अरब डॉलर हो गया. आयात में आई इस वृद्धि का सीधा असर व्यापार संतुलन पर भी पड़ा, जिसके चलते व्यापार घाटा बढ़ गया.
व्यापार घाटा बढ़कर 28.21 अरब डॉलर पहुंचा
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत का व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर रहा. वहीं मई 2025 में यह आंकड़ा 22.56 अरब डॉलर था. इस तरह सालाना आधार पर व्यापार घाटे में 25.04 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. मई महीने में व्यापार घाटा बढ़ने की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रहीं.
पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी, जिसका असर भारत के आयात बिल पर भी पड़ा.
मिडिल ईस्ट को होने वाले निर्यात में सुधार
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया के देशों को होने वाले भारतीय निर्यात में मई के दौरान सुधार देखने को मिला. उन्होंने कहा, “वेस्ट एशिया को होने वाला निर्यात लगभग मई 2025 के स्तर पर पहुंच गया है, और इसमें यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन को भेजे गए सामान की वजह से बढ़ोतरी हुई है.” यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने प्रमुख बाजारों में अपनी उपस्थिति बनाए रखी है.
यूएस-ईरान समझौते से बढ़ी उम्मीद
हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर भी वाणिज्य सचिव ने सकारात्मक उम्मीद जताई. अग्रवाल ने कहा, “अगर हाल ही में घोषित यूएस-ईरान शांति समझौता लंबे समय तक टिकता है, तो हमारी कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा.” विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनी रहती है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार दोनों को राहत मिल सकती है. राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत का निर्यात आधार लगातार मजबूत हुआ है. उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान देश का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है, जबकि सेवा क्षेत्र के निर्यात में तीन गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है.
एफटीए से और बढ़ेगी रफ्तार
सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में विभिन्न फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने के बाद निर्यात को और मजबूती मिलेगी. अग्रवाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि सभी एफटीए के आने से निर्यात में बढ़ोतरी की यह तेजी नए जोश के साथ जारी रहेगी.” सरकार का मानना है कि नए व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक अधिक पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात वृद्धि को और बल मिलेगा.
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