India US Trade Deal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील में भारत ने किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया है. उन्होंने कहा कि डेयरी, मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा सहित केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी जैसे फल, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग और तिलहन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई भी छूट नहीं दी गई है. प्रेस वार्ता के दौरान आईएएनएस के सवाल का जवाब देते हुए गोयल ने बताया कि अमेरिका के साथ अंतरिम समझौते के ढांचे के तहत भारत ने अपने उत्पादों के लिए प्राथमिकता के आधार पर बाजार तक पहुंच सुनिश्चित की है.
डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित
गोयल ने कहा कि भारत ने अपने डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा है और किसी भी शर्त पर छूट नहीं दी है. उन्होंने बताया कि अब कई भारतीय उत्पाद, जैसे चाय, मसाले, नारियल तेल, वनस्पति मोम, सुपारी, ब्राजील नट्स, शाहबलूत और विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियां, बिना किसी शुल्क के अमेरिका को निर्यात किए जा सकेंगे. गोयल के अनुसार, जड़ वाली सब्जियां, अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद, तिल, खसखस और खट्टे फलों के रस पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा और अब ये अमेरिकी बाजार में बिना किसी शुल्क के प्रवेश करेंगे.
निर्यात बढ़ेगा, किसानों की आजीविका सुरक्षित
उन्होंने आगे जोर दिया कि यह व्यापार समझौता किसानों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाता है और इसका उद्देश्य निर्यात के अवसरों को बढ़ाते हुए उनकी आजीविका की रक्षा करना है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार लगातार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है. इस व्यापार समझौते के तहत कई कृषि उत्पादों जैसे मसाले, चाय, कॉफी और उनसे जुड़े उत्पाद, नारियल व नारियल तेल, काजू समेत अन्य उत्पादों का अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर निर्यात किया जाएगा. इसके साथ ही रत्न और आभूषण, फार्मा उत्पादों और स्मार्टफोन का भी शुल्क मुक्त निर्यात संभव होगा.
निष्पक्ष और संतुलित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता पूरी तरह निष्पक्ष और संतुलित है, जो किसानों के हितों की रक्षा करता है और निर्यातकों को मजबूती देता है. उन्होंने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा, निर्यात को बढ़ावा देगा और कारोबार के नए अवसर पैदा करेगा. केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यह समझौता भारत के किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों के साथ-साथ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के हितों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाता है.
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