भारत का मखाना अब सिर्फ देश में पसंद किया जाने वाला खाद्य उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि दुनियाभर के बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना और उससे बने वैल्यू-एडेड उत्पादों का निर्यात किया है. अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाने की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ बिहार के किसानों और मखाना उद्योग को मिल रहा है.
मखाना उत्पादन में बिहार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
भारत में मखाना उत्पादन का सबसे प्रमुख केंद्र बिहार है. देश के कुल मखाना उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है. मखाना क्षेत्र को मजबूत करने और इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से मखाने के लिए अलग एचएस कोड लागू किया है. अलग एचएस कोड लागू होने से मखाना निर्यात की सटीक निगरानी करने में मदद मिल रही है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मखाने की अलग पहचान बनाने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
ऑस्ट्रेलिया पहुंचा जीआई टैग वाला मिथिला मखाना
मखाना निर्यात के क्षेत्र में बिहार ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा ने बिहार से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजने में मदद की है. बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना ऑस्ट्रेलिया भेजा गया.
यह खेप दरभंगा जिले के मखाना उत्पादक किसानों से खरीदे गए मखाने से तैयार की गई थी. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से बिहार के प्रमुख जीआई उत्पाद मिथिला मखाना की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी मजबूत होगी. साथ ही, निर्यात आधारित बाजारों तक पहुंच बढ़ने से किसानों की आय में सुधार की संभावना भी बढ़ेगी.
किसानों को बाजार भाव से 18 प्रतिशत ज्यादा कीमत
सरकार के मुताबिक, इस निर्यात पहल से जुड़े किसानों को मौजूदा बाजार भाव की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिली है. इससे यह संकेत मिलता है कि निर्यात केंद्रित वैल्यू चेन तैयार करने और किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की रणनीति उनकी आय बढ़ाने में मदद कर सकती है.
वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के बीच मखाना भारतीय कृषि निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पाद के तौर पर उभर रहा है. ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाजारों में भारतीय मखाने की पहुंच बनने से आने वाले समय में बिहार के मखाना उद्योग को और गति मिलने की संभावना है.
बिहार के कृषि मंत्री ने क्या कहा?
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना राज्य की पहचान है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार आधारित निर्यातकों की बढ़ती भागीदारी किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगी. उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि बिहार सरकार मखाना उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सहयोग देकर पूरी वैल्यू चेन को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है.
राज्य सरकार मखाना उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराती रहेगी. मंत्री ने विशेष रूप से फोरी समुदाय का भी उल्लेख किया, जिनकी पारंपरिक कौशल और विशेषज्ञता मखाना प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है. उन्होंने कहा कि इस समुदाय को आगे भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि ऑस्ट्रेलिया को जीआई टैग वाले मिथिला मखाना का पहला समुद्री निर्यात बिहार के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का प्रमाण है. इससे किसानों, निर्यातकों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए नए अवसर खुलेंगे और बिहार के मखाना क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी.
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