अक्टूबर में 5.3 अरब डॉलर तक पहुंचा भारत का PE और VC निवेश: Report

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश इस साल अक्टूबर में बढ़कर 5.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो महीने-दर-महीने 9% की बढ़त को दर्शाता है. इस उछाल के पीछे पब्लिक इक्विटी में निजी निवेश में आए 10 गुना इजाफे का बड़ा योगदान रहा. यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई. अर्न्स्ट एंड यंग और इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (IVCA)की रिपोर्ट के अनुसार सेक्टरवार देखा जाए तो फाइनेंशियल सर्विसेज ने 2.9 अरब डॉलर के साथ सबसे अधिक निवेश आकर्षित किया, जबकि ई-कॉमर्स सेक्टर ने 715 मिलियन डॉलर की बढ़त दर्ज की.

सालाना आधार पर 981% की वृद्धि दर्ज

इस वर्ष अक्टूबर में पीआईपीई डील 2.1 अरब डॉलर के साथ सबसे अधिक रही, जिसमें सालाना आधार पर 981% की वृद्धि दर्ज की गई. जबकि स्टार्टअप निवेश ने 2 अरब डॉलर के साथ सालाना आधार पर 175% की वृद्धि दर्ज करवाई. फाइनेंशियल सर्विसेज, ई-कॉमर्स एंड टेक्नोलॉजी ने मिलकर मासिक निवेश मूल्य में 77% का योगदान दिया. ईवाई में प्राइवेट इक्विटी सर्विसेज के पार्टनर और नेशनल लीडर विवेक सोनी ने कहा, बीते वर्ष अक्टूबर की तुलना में डील की संख्या 112 से घटकर इस वर्ष अक्टूबर में 102 रह गई है.

इंडस्ट्रियल सेक्टर में मजबूत मांग देखने की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में इंडस्ट्रियल सेक्टर में मजबूत मांग देखने की संभावना है, जिसे बड़े पैमाने पर हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सरकार द्वारा चलाए जा रहे कैपिटल एक्सपेंडिचर कार्यक्रमों से समर्थन मिल रहा है. बड़े सौदों ने कुल मासिक निवेश मूल्य में 70% का योगदान दिया, जिसमें 9 मेगा डील्स शामिल थीं, जिनका कुल मूल्य 3.7 अरब डॉलर रहा. पीई/वीसी निवेश 81% की बढ़त के साथ 5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले 13 महीनों का सर्वोच्च स्तर है.

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में 83% की भारी गिरावट दर्ज

वहीं रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में 83% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 291 मिलियन डॉलर रह गया. दूसरी तिमाही के नतीजे एक मिक्स्ड कॉरपोरेट आउटलुक को दिखाते हैं, जिसके साथ भारत में पीई/वीसी लैंडस्केप एक एक्टिव फेज के लिए तैयार है. जहां एक तरफ बैंकिंग, आईटी और FMCG सेक्टर मजबूत प्रदर्शन जारी रखेंगे, वहीं दूसरी ओर कमोडिटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों पर मार्जिन और मांग से जुड़ा दबाव बना रहने की संभावना है.
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