दिसंबर में मजबूत रहा भारत का सर्विस सेक्टर, PMI 58 पर: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Service Sector: दिसंबर महीने में भारत के सेवा क्षेत्र ने मजबूती के साथ अपना प्रदर्शन जारी रखा. हालांकि, HSBC इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स नवंबर 2025 के 59.8 से फिसलकर दिसंबर में 58 पर आ गया. मंगलवार को जारी S&P Global की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक, यह सूचकांक अब भी 50 के स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था में विस्तार की प्रक्रिया जारी है. दिसंबर का PMI स्तर अपने दीर्घकालिक औसत 55 से ऊपर रहा, जिससे यह साफ होता है कि सेवा क्षेत्र की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है.

नए काम की रफ्तार घटी

एसएंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 11 महीनों की तुलना में नए काम और उत्पादन की गति थोड़ी कम हुई है. इसका एक कारण यह भी है कि कई कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती फिलहाल रोक दी है. रिपोर्ट के अनुसार, नए काम और निर्यात से जुड़े ऑर्डर में अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें एशिया, उत्तरी अमेरिका, मध्य पूर्व और ब्रिटेन से भारत को ज्यादा काम मिला है. कंपनियों के अनुसार, कच्चे माल की लागत और सेवाओं के दामों में पहले के मुकाबले तेज़ इजाफा देखने को मिला है. इसके बावजूद महंगाई की दर अब भी अपने लंबे समय के औसत से नीचे बनी हुई है.

मजबूत मांग से सेवा क्षेत्र को सहारा

रिपोर्ट में बताया गया कि अनुकूल मूल्य स्तर, मजबूत मांग और ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी ने सेवा क्षेत्र को सहारा दिया है. हालांकि, कुछ कंपनियों ने यह भी संकेत दिया कि कम कीमत पर सेवाएं देने वाले प्रतिस्पर्धियों की मौजूदगी के कारण उनकी विकास दर पर आंशिक असर पड़ा है. एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलीएना डी लीमा ने कहा कि दिसंबर में सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन साल के अंत में कुछ संकेतकों में गिरावट से यह पता चलता है कि नए साल में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है.

महंगाई नियंत्रण में निर्यात बढ़ा

उन्होंने यह भी कहा कि सेवा क्षेत्र के लिए अच्छी बात यह है कि महंगाई अभी नियंत्रण में है. यदि कंपनियों के खर्च धीरे-धीरे ही बढ़ते रहे, तो वे कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ाएंगी, जिससे बिक्री बढ़ेगी और नए रोजगार भी बन सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, हालिया अवधि में रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत बढ़ी है, लेकिन इसी का लाभ निर्यात गतिविधियों को मिला है. दिसंबर के दौरान सेवा क्षेत्र के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. आगे के परिदृश्य की बात करें तो निजी क्षेत्र की कंपनियां भविष्य को लेकर अब भी सकारात्मक बनी हुई हैं, हालांकि उनका समग्र भरोसा घटकर पिछले 41 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो आने वाले समय में सतर्कता के संकेत देता है.

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