जनवरी में शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा, हालांकि इसके बावजूद मिडकैप शेयर सालाना आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स जनवरी के दौरान 3.53% फिसला, लेकिन पूरे वर्ष के हिसाब से इसने 8.26% का रिटर्न दिया और सबसे अधिक लाभ देने वाला इंडेक्स साबित हुआ. मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी मिडकैप 150 में पिछले तीन महीनों में 2.52% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि छह महीने की अवधि में इसमें 0.61% की हल्की बढ़त देखने को मिली.
सेक्टरवार प्रदर्शन और प्रमुख इंडेक्स की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में निफ्टी 500 इंडेक्स को केवल कमोडिटी सेक्टर से ही सकारात्मक योगदान मिला. सेक्टर के हिसाब से देखें तो मेटल और डिफेंस सेक्टर में करीब 6% की तेजी रही, जबकि FMCG, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में 6 से 11% तक की गिरावट आई. जनवरी में निफ्टी 50 इंडेक्स में 3.10% की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन एक साल में यह 7.71% चढ़ा. निफ्टी 500 जनवरी में लगभग स्थिर रहा और सालाना आधार पर इसमें 6.94% की तेजी आई. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स जनवरी में नुकसान में रहे, जिनमें 3.53% से 5.52% तक की गिरावट दर्ज की गई.
फैक्टर आधारित प्रदर्शन का विश्लेषण
रिपोर्ट के मुताबिक, वैल्यू फैक्टर ने अन्य सभी निवेश कारकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. जनवरी में इसमें 2.4% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि सालाना आधार पर यह करीब 25% ऊपर रहा. इसके विपरीत, मोमेंटम, लो-वोलैटिलिटी और क्वालिटी फैक्टर जनवरी में दबाव में रहे, हालांकि पूरे साल के आंकड़ों में इन श्रेणियों में भी सकारात्मक रिटर्न देखने को मिला. वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 250 और निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स जनवरी के दौरान क्रमशः 5.52% और 5.66% तक गिर गए.
एसेट क्लास प्रदर्शन और आर्थिक संकेतक
एसेट क्लास के लिहाज से चांदी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली परिसंपत्ति के रूप में उभरी, जिसने जनवरी में 43.34% का रिटर्न दिया और सालाना आधार पर इसमें 226.50% की बड़ी बढ़त दर्ज की गई. वहीं सोने ने जनवरी में 14.06% और पूरे साल में 77.16% का रिटर्न दिया. जनवरी में महंगाई दर यानी सीपीआई मुद्रास्फीति कम रही, लेकिन हल्की बढ़त के साथ यह 1.33% तक पहुंच गई. 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 6.70% हो गई, जिससे बाजार की ब्याज दरों में हल्का उछाल दिखा, जबकि नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं. कंपोजिट पीएमआई 59.5 पर रहा और जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है.
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