भारतीय डाक विभाग (इंडिया पोस्ट) ने सोमवार को अपनी आय बढ़ाने, संचालन को अधिक प्रभावी बनाने और जमीनी स्तर पर नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से एक व्यापक रोडमैप जारी किया. विभाग के अनुसार, FY25–26 की पहली तीन तिमाहियों में उसकी कुल आय में 8.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है. आंकड़ों के मुताबिक, FY25 की पहली तीन तिमाहियों में डाक विभाग का कुल राजस्व 9,385 करोड़ रुपये था, जो FY26 की इसी अवधि में बढ़कर 10,211 करोड़ रुपये हो गया. पार्सल सेगमेंट में 12.3% की वृद्धि दर्ज की गई. यह बढ़ोतरी उत्पादों के पुनर्गठन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स हब वाले शहरों में विशेष रणनीति के कारण संभव हुई.
स्पीड पोस्ट और नागरिक सेवाओं से मजबूती
इंडिया पोस्ट ने अपनी 24 स्पीड पोस्ट पार्सल सेवा के तहत टियर-1 शहरों और मेट्रो शहरों के बीच अगले दिन डिलीवरी की पायलट परियोजना शुरू की है. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद सहित 6 बड़े शहरों में 95 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी प्रयास सफलता के साथ किए गए. कोर सिटिजन सर्विसेज (सीसीएस) सेगमेंट में आय लगभग दोगुनी हो गई और इसमें 95.3% की वृद्धि दर्ज की गई. आधार नामांकन और अपडेट केंद्र, पासपोर्ट सेवाएं, केवाईसी सत्यापन और टेलीकॉम साझेदारी इसके प्रमुख कारण रहे. पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (पीएलआई) ने 15% वार्षिक वृद्धि के साथ अपना मजबूत प्रदर्शन बनाए रखा है, जो वित्त वर्ष 2024 की 6% औसत उद्योग वृद्धि दर से काफी अधिक है.
बीमा और निर्यात सेवाओं में विस्तार
PLI और ग्रामीण पीएलआई योजनाओं के तहत कुल 1.24 करोड़ सक्रिय पॉलिसियां संचालित हैं और प्रबंधन के तहत कुल संपत्ति 2.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. डाक निर्यात केंद्र (डीएनके) पहल के अंतर्गत देशभर में 1,000 से अधिक निर्यात सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे एमएसएमई और स्थानीय विक्रेताओं को बड़ा सहयोग मिल रहा है. 31 जनवरी 2026 तक इन केंद्रों ने लगभग 13 लाख पार्सलों का प्रबंधन किया और 135 देशों में 303 करोड़ रुपये मूल्य के निर्यात को संभव बनाया. विभाग ने अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे प्रमुख देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सहयोग की पायलट परियोजनाएं भी शुरू की हैं और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है ताकि मिड और लास्ट माइल डिलीवरी मजबूत हो सके. पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक (पीओएसबी) में डिजिटल सेवाओं का विस्तार जारी है.
डिजिटल बैंकिंग और खातों में बढ़ोतरी
आधार आधारित ई-केवाईसी, यूपीआई एकीकरण और वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया लागू की गई है. नवंबर 2025 तक कोर बैंकिंग सॉल्यूशन के तहत 37.36 करोड़ खाते और प्रमाणपत्र जुड़े हैं, जिनमें कुल जमा 21.77 लाख करोड़ रुपये है. इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के खाते 12.91 करोड़ से अधिक हो चुके हैं, जबकि 3.80 करोड़ सुकन्या समृद्धि खाते खोले गए हैं. विभाग का लक्ष्य FY28–29 तक बीमा सेवाओं में ऑनलाइन लेनदेन की हिस्सेदारी को 9% से बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक पहुंचाना और पूरी तरह कागज रहित प्रणाली की ओर बढ़ना है. डाकघरों का पुनर्गठन भी जनसंख्या मानकों के आधार पर किया जा रहा है, ताकि सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकें.
दक्षता बढ़ाने के लिए सुधार
दक्षता बढ़ाने के लिए स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड पोस्ट प्रोसेसिंग हब का विलय तथा विभिन्न मेल श्रेणियों का एकीकरण जैसे कदम उठाए गए हैं. मार्च 2026 तक एन-जेन पहल के तहत 100 डाकघरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा. इसके अलावा, 46 शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी कर तकनीक आधारित आधुनिक कैंपस डाक सेवाएं भी विकसित की जा रही हैं. डाक विभाग का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य वित्तीय मजबूती हासिल करना, ग्राहकों को बेहतर अनुभव देना और तेजी से बदलते बाजार में इंडिया पोस्ट को एक प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स तथा वित्तीय सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करना है.
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