भारत का मिलिट्री टेक सेक्टर तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है. पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में फंडिंग में 61 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है. मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन द्वारा शुक्रवार को जारी ‘इंडिया मिलिट्री टेक रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2025 में अब तक इस सेक्टर में कुल 192.4 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, जो एक कैलेंडर वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी फंडिंग है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2016 से अब तक मिलिट्री टेक स्टार्टअप्स ने कुल 211 फंडिंग राउंड्स में 611 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. खास बात यह है कि इस अवधि के दौरान फंडिंग डील्स की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है, जहां 2016 में केवल 3 डील्स हुई थीं, वहीं 2023 में यह आंकड़ा 36 तक पहुंच गया। 2025 में अब तक 20 डील्स हो चुकी हैं.
दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु बने हब
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु इस सेक्टर के दो प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं. दिल्ली-एनसीआर की कंपनियों ने 194.6 मिलियन डॉलर और बेंगलुरु की कंपनियों ने 166.1 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है.
निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी
फिलहाल भारत में 150 से अधिक सक्रिय मिलिट्री टेक स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से 76 को अब तक इक्विटी फंडिंग मिल चुकी है. शुरुआती चरण की कंपनियों ने फंडिंग परिदृश्य पर दबदबा बनाया हुआ है. इस साल राफे एमफिब्र द्वारा 100 मिलियन डॉलर का सीरीज-बी फंडिंग राउंड अब तक का सबसे बड़ा सौदा रहा. इसके अलावा, न्यूस्पेस रिसर्च ने 33 मिलियन डॉलर और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने 25.4 मिलियन डॉलर जुटाए हैं.
अंतिम चरण की कंपनियां भी आगे
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लेटर स्टेज फंडिंग में भी तेजी देखी जा रही है. बिग बैंग बूम सॉल्यूशंस ने सीरीज-सी राउंड में 29.9 मिलियन डॉलर और टोनबो इमेजिंग ने सीरीज-डी में 20.4 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की.
सरकारी योजनाओं से मिल रही रफ्तार
‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘आईडीईएक्स’ और ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स’ जैसी सरकारी पहलों ने मिलिट्री टेक सेक्टर को एक नई गति दी है. रिपोर्ट के अनुसार, अब तक इस क्षेत्र में लगभग 110 वेंचर कैपिटल फर्मों ने निवेश किया है और चार कंपनियां पहले ही पब्लिक हो चुकी हैं, जिससे इस क्षेत्र में परिपक्वता और समेकन का संकेत मिलता है.