मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम से बढ़ेगा स्थानीय उत्पादन, पुर्जों का घरेलू निर्माण होगा मजबूत: Industry

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Mobile Phone Manufacturing Scheme: हाल ही में मंजूर की गई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दे सकती है. उद्योग जगत का मानना है कि इस योजना से स्थानीय मूल्य संवर्धन बढ़ेगा, आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम होगी और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में बैकवर्ड इंटीग्रेशन मजबूत होगा. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत शुरू की गई योजनाएं अब केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पादन के स्तर तक पहुंच चुकी हैं. अब तक 106 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इनमें से 38 विनिर्माण संयंत्र उत्पादन शुरू कर चुके हैं, जबकि 16 अन्य परियोजनाएं निर्माण के उन्नत चरण में हैं.

आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में बढ़ रहा भारत

सेमी इंडिया और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि उद्योग लंबे समय से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मजबूत डिजाइन टीम विकसित करने, स्थानीय स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने की जरूरत पर जोर देता रहा है. उन्होंने कहा कि मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि यह बदलाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है. चंदक ने कहा, “भारत लंबे समय तक मल्टीलेयर पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल, सेंसर और रिले जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के लिए आयात पर निर्भर रहा है. लेकिन अब स्थिति बदल रही है और भारत केवल वैश्विक कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.”

उन्होंने बताया कि इस बदलाव का प्रमाण इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत हाल ही में मंजूर की गई 31 नई परियोजनाएं हैं. इनमें करीब 6,844 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है. इससे पहले पांच महीने के भीतर ही 75 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें 61,671 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव था.

पहली बार कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन

नई परियोजनाओं के तहत देश में पहली बार कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों का घरेलू उत्पादन शुरू होगा. इनमें फिल्टर, कॉइल और स्पीकर जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों के साथ-साथ एसीटिलीन ब्लैक और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे जरूरी कच्चे माल का निर्माण भी शामिल है. अशोक चंदक के मुताबिक, यह बदलाव भारत को केवल मोबाइल फोन असेंबली केंद्र से आगे ले जाकर घटक और सामग्री आधारित विनिर्माण मॉडल की ओर बढ़ा रहा है. इससे भारतीय बौद्धिक संपदा, भारतीय डिजाइन और भारतीय विनिर्माण क्षमताओं को हर स्तर पर बढ़ावा मिलेगा.

2014-15 के मुकाबले 33 गुना बढ़ा मोबाइल उत्पादन

EY India में दूरसंचार और ग्राहक एवं उद्योग क्षेत्र के प्रमुख प्रशांत सिंघल ने कहा कि नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना पहले की योजनाओं की सफलता को आगे बढ़ाएगी. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना और मोबाइल निर्यात 165 गुना बढ़ चुका है. सिंघल ने आगे कहा कि नई योजना भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को विशेष प्रोत्साहन देगी. इसमें घरेलू स्तर पर पुर्जों की खरीद और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन शामिल हैं. इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने और देश में एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होने की उम्मीद है.

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