भारत की Space Economy अगले एक दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Space Economy: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है. सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश की स्पेस इकोनॉमी करीब 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और नीतिगत सुधारों के चलते इसके अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे समय मना रहा है, जब देश का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से नए विस्तार की ओर बढ़ रहा है. अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी, स्टार्टअप्स की संख्या और निवेश में तेजी इस बदलाव को दर्शाती है.

440 तक पहुंची स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या

भारत में पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है. खास बात यह है कि 2014 में देश में सिर्फ 1 पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप था. यानी एक दशक से कुछ अधिक समय में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ है. निजी कंपनियां अब उपग्रह, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष आधारित एप्लीकेशंस जैसे क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं.

निजी निवेश में करीब छह गुना बढ़ोतरी

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश भी तेजी से बढ़ा है. वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर का निजी निवेश हुआ था, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर हो गया. अकेले 2026 में अब तक अंतरिक्ष क्षेत्र में 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है. बढ़ते निवेश को देश में विकसित हो रहे निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

52 गैर-सरकारी संस्थाओं को 113 ऑथराइजेशन

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को कुल 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं. इनमें 18 स्टार्टअप्स भी शामिल हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है. इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का संकेत मिलता है.

2020 में निजी क्षेत्र के लिए खोला गया स्पेस सेक्टर

भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था. इसके बाद उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी का रास्ता खुला. इस बदलाव को भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है.

Space Policy 2023 से निजी भागीदारी को बढ़ावा

आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ावा दिया. इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया. इससे निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने का ढांचा और अधिक स्पष्ट हुआ.

NSIL का राजस्व 3,000 करोड़ रुपये के पार

इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है. इसके साथ ही यह इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाने का काम भी करती है. NSIL का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया. यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है.

IN-SPACe ने 71 तकनीकों के ट्रांसफर में की मदद

IN-SPACe सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक IN-SPACe ने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की है. बढ़ते स्टार्टअप्स, निजी निवेश, तकनीक ट्रांसफर और नीतिगत सुधारों के साथ भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निजी उद्योग और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी के साथ एक बड़े व्यावसायिक इकोसिस्टम के रूप में विस्तार कर रहा है.

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