Budapest: हंगरी के पाक्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र में करीब एक महीने बाद सुधार हुआ है. डेन्यूब नदी का जलस्तर सुधरने और आपातकालीन इंतजामों से रिएक्टरों को ठंडा रखने की स्थिति अब पहले से बेहतर हुई है. इसके बाद यूनिट-3 का टरबाइन 6 दोबारा शुरू कर दिया गया है. प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने कहा है कि बुधवार तक प्लांट अपनी पूरी 2,000 मेगावाट क्षमता पर लौट सकता है. करीब एक महीने बाद पाक्स संयंत्र के सभी आठ टरबाइन फिर से चलने की उम्मीद है.
पर्याप्त कूलिंग वॉटर लेना मुश्किल
यह संकट किसी तकनीकी खराबी से ज्यादा नदी के असामान्य रूप से कम जलस्तर से जुड़ा था. डेन्यूब का पानी इतना कम हो गया था कि परमाणु संयंत्र के लिए पर्याप्त कूलिंग वॉटर लेना मुश्किल हो गया था. ऐसे में बिजली उत्पादन घटाना पड़ा और एक समय प्लांट के आठ में से सिर्फ एक टरबाइन चल रहा था. पाक्स न्यूक्लियर पावर प्लांट बुडापेस्ट से करीब 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. इसमें चार VVER-440 रिएक्टर यूनिट और कुल आठ टरबाइन हैं.
प्लांट के रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए पानी पर निर्भर
यह संयंत्र सामान्य परिस्थितियों में हंगरी की करीब आधी बिजली जरूरत पूरी करता है. लेकिन जुलाई के आखिर में डेन्यूब का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. प्लांट के चारों रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए नदी के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है. पानी कम होने के कारण बिजली उत्पादन में बड़ी कटौती करनी पड़ी. इस महीने की शुरुआत में यूनिट-3 का टरबाइन 6 भी बंद कर दिया गया था.
10 अगस्त को दूसरा टरबाइन फिर शुरू
हालात सुधरने के बाद 10 अगस्त को दूसरा टरबाइन फिर शुरू किया गया था. अब यूनिट-3 का टरबाइन 6 भी चालू कर दिया गया है. प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने शनिवार शाम संयंत्र से लाइव प्रसारण के दौरान कहा कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा, तो बुधवार तक प्लांट अपनी 2,000 मेगावाट की पूरी क्षमता हासिल कर सकता है. कम जलस्तर से निपटने के लिए हंगरी सरकार को असामान्य इंतजाम करने पड़े.
बिजली ढांचे में बेहद अहम भूमिका
पिछले सप्ताह प्लांट के लिए पर्याप्त ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए पाक्स और डुनास्जेटबेनेडेक के बीच डेन्यूब पर एक डूबा हुआ बांध यानी वियर बनाया गया. इसके अलावा नदी के एक हिस्से में 80 मीटर लंबे दो बजरों को नियंत्रित तरीके से डुबोया गया. इन इंतजामों से प्लांट के पास नदी का जलस्तर करीब 15 सेंटीमीटर बढ़ गया. पाक्स संयंत्र हंगरी के बिजली ढांचे में बेहद अहम भूमिका रखता है. सामान्य तौर पर यह देश की कुल बिजली जरूरत का करीब आधा हिस्सा पूरा करता है. इसी वजह से डेन्यूब का जलस्तर गिरना सिर्फ पर्यावरण या नदी से जुड़ी समस्या नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर देश की बिजली व्यवस्था पर पड़ा.
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