Paneer Ban: अगर आप भी बाजार से पनीर खरीदकर खाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. पनीर के नाम पर बिकने वाले नकली या नॉन-डेयरी उत्पादों को लेकर कर्नाटक सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने लोगों की सेहत और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘एनालॉग पनीर’ या ‘नॉन-डेयरी पनीर’ के उत्पादन से लेकर बिक्री तक पर पूरे एक साल के लिए रोक लगा दी है. यह प्रतिबंध पूरे कर्नाटक में लागू किया गया है और 17 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के तहत इसे लागू किया गया है.
कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के मुताबिक, यह रोक ऐसे डेयरी एनालॉग उत्पादों पर है जिन्हें ‘पनीर’ के नाम से बाजार में बेचा या उपभोक्ताओं के सामने असली पनीर के तौर पर पेश किया जाता है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानकों के मुताबिक पनीर दूध से तैयार होने वाला मानकीकृत खाद्य उत्पाद है.
क्या होता है एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर?
अधिकारियों के मुताबिक, जब पनीर तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली दूध की वसा या दूध के ठोस पदार्थों को पूरी तरह या आंशिक रूप से वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या दूसरी गैर-डेयरी सामग्री से बदल दिया जाता है, तो ऐसे उत्पाद को एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर कहा जाता है. ऐसे उत्पाद दिखने या इस्तेमाल में असली पनीर जैसे हो सकते हैं, लेकिन इन्हें खाद्य नियमों के तहत ‘पनीर’ के नाम से बेचने की अनुमति नहीं है. विभाग के अनुसार, गैर-डेयरी सामग्री से तैयार ऐसे उत्पादों को पनीर के तौर पर लेबल, प्रचारित या बाजार में पेश नहीं किया जा सकता.
कर्नाटक सरकार ने किन चीजों पर लगाया बैन?
कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 17 अगस्त 2026 को इस संबंध में सरकारी अधिसूचना जारी की. इसके जरिए एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर से जुड़ी कई गतिविधियों पर एक साल के लिए रोक लगाई गई है.
बैन के तहत:
- एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण पर रोक.
- ऐसे उत्पाद की प्रोसेसिंग नहीं की जा सकेगी.
- इसकी पैकिंग पर भी रोक रहेगी.
- ऐसे उत्पाद का स्टोरेज नहीं किया जा सकेगा.
- इसके वितरण और परिवहन पर रोक रहेगी.
- इसकी थोक और खुदरा बिक्री नहीं की जा सकेगी.
- इसे बिक्री के लिए प्रदर्शित नहीं किया जा सकेगा.
- उपभोक्ताओं को इसे ‘पनीर’ के नाम से पेश या सप्लाई नहीं किया जा सकेगा.
- खाद्य कारोबारी इसे किसी दूसरे खाद्य उत्पाद को तैयार करने में एक सामग्री के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.
यह प्रतिबंध 17 अगस्त 2027 तक प्रभावी रहेगा.
असली पनीर को लेकर क्या है नियम?
खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक, असली पनीर एक मानकीकृत दूध आधारित डेयरी उत्पाद है. इसमें दूध की वसा महत्वपूर्ण घटक होती है. यही वजह है कि दूध की वसा या दूध के अन्य घटकों की जगह वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या दूसरी गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल करके तैयार किए गए उत्पाद को ‘पनीर’ के नाम से बाजार में बेचना नियमों के अनुरूप नहीं है. विभाग ने खाद्य कारोबारियों को आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में पनीर के कई नमूनों की जांच भी की गई है.
क्या यह सिर्फ मिलावट के खिलाफ कार्रवाई है?
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल इस आधार पर नहीं है कि हर ऐसे उत्पाद में मिलावट पाई गई है. प्रतिबंध का दायरा उन एनालॉग या नॉन-डेयरी उत्पादों पर है जिन्हें निर्धारित मानक के बिना ‘पनीर’ के नाम से बेचा या पेश किया जा रहा है. यानी किसी उत्पाद में वनस्पति तेल या वनस्पति वसा की मिलावट साबित होना ही इस आदेश का एकमात्र आधार नहीं है. आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि दूध से बने मानकीकृत पनीर के नाम पर गैर-डेयरी विकल्पों को बाजार में न बेचा जाए.
कौन से प्रोडक्ट इस बैन से बाहर रहेंगे?
कर्नाटक सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह प्रतिबंध हर डेयरी या खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगा. जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अलग से गुणवत्ता मानक निर्धारित किए हैं, वे इस आदेश के दायरे में नहीं आएंगे.
इनमें शामिल हैं:
- फ्रोजन डेजर्ट
- प्रोसेस्ड चीज
- मिक्स्ड फैट स्प्रेड
- अन्य मानकीकृत खाद्य उत्पाद
इन उत्पादों के लिए अलग-अलग निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानक मौजूद हैं, इसलिए कर्नाटक का यह विशेष प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होगा. कर्नाटक सरकार का यह कदम राज्य में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में ‘पनीर’ के नाम से वही उत्पाद बेचा जाए जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप हो.
यह भी पढ़े: मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम से बढ़ेगा स्थानीय उत्पादन, पुर्जों का घरेलू निर्माण होगा मजबूत: Industry