अगस्त में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम 10% बढ़कर ₹27,455 करोड़ पहुंचा, हेल्थ सेगमेंट की सबसे बड़ी हिस्सेदारी

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Non Life Insurance Premium August 2026: भारत में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने अगस्त में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. इस दौरान कुल प्रीमियम बढ़कर 27,455 करोड़ रुपये हो गया. हेल्थ इंश्योरेंस इस ग्रोथ का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा. केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फसल पंजीकरण की समय-सीमा में बदलाव और आग व फसल से जुड़े नुकसान में कमी का असर भी सेक्टर की वृद्धि पर पड़ा है.

अप्रैल-अगस्त में ग्रोथ बढ़कर 9.6 प्रतिशत हुई

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में अप्रैल से अगस्त के दौरान नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर की ग्रोथ बढ़कर 9.6 प्रतिशत हो गई. एक साल पहले इसी अवधि में यह 6 प्रतिशत थी. रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त के आंकड़ों में वृद्धि की एक प्रमुख वजह फसल पंजीकरण के समय में बदलाव रहा. इसके अलावा, आग और फसल से जुड़े नुकसान का प्रभाव कम होने से भी ग्रोथ को सहारा मिला. जुलाई में फसल बीमा प्रीमियम तीन गुना बढ़कर 3,274 करोड़ रुपये हो गया. इसकी वजह राज्यों द्वारा खरीफ फसल पंजीकरण की समय-सीमा 31 जुलाई से आगे बढ़ाना रही. इसके चलते कुछ कारोबार अगस्त तक टल गया. रिपोर्ट के मुताबिक, फसल प्रीमियम में बढ़ोतरी के कारण आग और फसल से जुड़े नुकसान का प्रभाव भी 11.1% अंक से घटकर 4.2$ अंक रह गया.

मोटर इंश्योरेंस की ग्रोथ में आई सुस्ती

आग और फसल बीमा को छोड़कर, जुलाई में इंडस्ट्री की ग्रोथ लगभग 17 प्रतिशत से घटकर 14.3% रह गई. रिपोर्ट के अनुसार, गाड़ियों की बिक्री और मोटर कारोबार में आई सुस्ती इसका एक कारण रही. केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर प्रियेश रूपारेलिया ने कहा कि इस सुस्ती का मतलब रिटेल डिमांड में कमी नहीं है. उनके मुताबिक, यह गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में कमी और सरकारी हेल्थ स्कीम के प्रीमियम की बुकिंग में उतार-चढ़ाव को दर्शाती है.

हेल्थ इंश्योरेंस में लगातार पांचवें महीने 30% से ज्यादा ग्रोथ

रिपोर्ट के मुताबिक, रिटेल सेगमेंट ने नॉन-लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री के विस्तार को आगे बढ़ाया. हेल्थ इंश्योरेंस में लगातार पांचवें महीने 30 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई. अगस्त में इसकी ग्रोथ 32.5% रही. वहीं, मोटर इंश्योरेंस में भी लगातार पांचवें महीने दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई. अगस्त में कुल प्रीमियम में हेल्थ इंश्योरेंस की हिस्सेदारी 39.5% रही. वित्त वर्ष 2027 में अप्रैल से अगस्त के दौरान यह हिस्सा 44% था. अगस्त में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम सालाना आधार पर 18% बढ़कर 10,834 करोड़ रुपये हो गया. जुलाई में इसकी वृद्धि 26% रही थी, जबकि साल की शुरुआत से अब तक हेल्थ प्रीमियम में 20.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

हेल्थ इंश्योरेंस ग्रोथ की गुणवत्ता में सुधार

प्रियेश रूपारेलिया ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री की ग्रोथ का मुख्य आधार बना हुआ है और इसकी वृद्धि की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है. उन्होंने इसके पीछे रिन्यूअल रेट में बढ़ोतरी, क्लेम रेश्यो में कमी और नए ग्राहकों के जुड़ने को प्रमुख कारण बताया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सितंबर के दूसरे हिस्से से रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस की ग्रोथ की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है. इसकी वजह जीएसटी से जुड़े बेस की तुलना आसान होना है.

प्राइवेट और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स की हिस्सेदारी बढ़ी

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में प्राइवेट इंश्योरर्स और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स ने कुल प्रीमियम का 73.3 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया. यह इस साल दर्ज की गई उनकी सबसे अधिक हिस्सेदारी रही.

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