New Delhi: खाड़ी देशों में भले ही तनाव की खबरें कम हो गई हों, लेकिन समंदर में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं. युद्ध विराम के बीच अब होर्मुज से जहाजों का आना-जाना तो दोबारा तेजी से शुरू हो गया है लेकिन अब वहां जहाजों की भारी कमी हो गई है. इसी वजह से भारत आने वाले एक बड़े तेल टैंकर का किराया सामान्य दर से करीब 9 गुना ज्यादा तय हुआ है, जो इस साल का सबसे महंगा किराया बताया जा रहा है.
होर्मुज वाला संकट खत्म नहीं हुआ
इसके साथ दक्षिण कोरिया की शिपिंग कंपनी सिनोकोर की इस बुकिंग ने साफ कर दिया है कि होर्मुज वाला संकट खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब एक नए रूप में सामने आ गया है. फारस की खाड़ी से भारत तक कच्चा तेल लाने के लिए जिस बड़े जहाज को बुक किया गया है, उसमें करीब 20 लाख बैरल तेल आ सकता है. शिप ब्रोकर्स के मुताबिक इसका किराया सामान्य से लगभग 9 गुना ज्यादा तय हुआ है और यह साल की सबसे बड़ी बुकिंग है.
समझौता होने के बाद तनाव कुछ कम
जून 2026 में अमरीका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद तनाव कुछ कम हुआ तो तेल कंपनियों ने राहत की सांस ली और दोबारा खाड़ी से तेल मंगाने की कोशिश शुरू की, लेकिन यहीं से असली मुसीबत शुरू हुई. तेल तो वहां मौजूद है लेकिन उसे लाने के लिए पर्याप्त जहाज नहीं बचे हैं. तनाव के महीनों में कई जहाज वहां से दूर चले गए थे और अब वापसी इतनी जल्दी नहीं हो पा रही.
सिर्फ 65 खाली जहाज ही पहुंच सकते हैं
तनाव कम होने के बाद ओमान की खाड़ी में एक हफ्ते के अंदर सिर्फ 65 खाली जहाज ही पहुंच सकते हैं, जिनमें से 25 जहाज सिर्फ सिनोकोर कंपनी के पास हैं. मांग ज्यादा है और जहाज कम हैं इसलिए खरीदार मजबूरी में मुंह मांगी कीमत दे रहे हैं. इस पूरे संकट में भारत सरकार अपनी ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट पर है. सरकार भारत के समुद्री हितों को बचाने के लिए लगातार अंतर्राष्ट्रीय एजैंसियों के साथ बातचीत में जुटी है.
खतरनाक रास्ते सफलतापूर्वक पार
राहत की बात यह है कि 94 भारतीय नाविक और 8.6 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल से भरे 3 भारतीय जहाज देश वैभव, देश विभोर और सन्मार हेराल्ड इस खतरनाक रास्ते को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं. ये जहाज 24 जून से 1 जुलाई 2026 के बीच भारत के बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं. विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमरीका-ईरान समझौते के बाद से भारत आने वाले कुल 11 जहाज इस रास्ते को सुरक्षित पार कर चुके हैं.
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