Petrol Diesel News: मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर केवल युद्ध या राजनीतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी सीधा प्रभाव पड़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व चीफ इकॉनॉमिस्ट और हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान से जुड़ा मौजूदा संकट जल्द खत्म नहीं हुआ, तो जून के आखिर तक कच्चे तेल की कीमतें 140 से 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो भारत जैसे देशों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है, क्योंकि इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर देखने को मिल सकता है. आइए समझते हैं पूरा मामला.
आखिर क्यों बढ़ रहा है तेल संकट?
दरअसल, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव की वजह से तेल सप्लाई को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है. अगर यहां सप्लाई थोड़ी भी प्रभावित होती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कमी की स्थिति बन सकती है. इसी को लेकर गीता गोपीनाथ ने कहा है कि अगर यह संकट एक महीने और जारी रहता है, तो तेल बाजार को बड़ा झटका लग सकता है. उन्होंने साफ कहा कि 140 से 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने वाला तेल दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है.
भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ सकता है?
भारत पर इस संकट का असर ज्यादा होने की एक बड़ी वजह यह है कि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है. भारत विदेशों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है. अगर कच्चा तेल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. इससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की पूरी आर्थिक व्यवस्था पर इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है.
सिर्फ पेट्रोल-डीजल नहीं, हर चीज हो सकती है महंगी
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल गाड़ियों में भरने वाले ईंधन तक सीमित नहीं रहता. ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. सब्जियां, राशन, दूध, फल और अन्य जरूरी सामान की लागत बढ़ सकती है. इसके अलावा फ्लाइट टिकट, ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं और परिवहन से जुड़ी कई अन्य सुविधाएं भी महंगी हो सकती हैं. यानी अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है और घर का बजट भी प्रभावित हो सकता है.
IMF ने क्यों जताई चिंता?
IMF का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो दुनिया में महंगाई एक बार फिर तेजी पकड़ सकती है. महंगाई बढ़ने का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है. इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर मंदी का खतरा भी बढ़ सकता है. गीता गोपीनाथ ने यह भी कहा कि भले ही तनाव कम हो जाए, लेकिन तेल की कीमतें तुरंत पुराने स्तर पर वापस नहीं आएंगी, क्योंकि कई जगहों पर तेल सप्लाई सिस्टम प्रभावित हुआ है.
क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?
फिलहाल भारत सरकार की तरफ से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया है. हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो इसका असर भारत में भी देखने को मिल सकता है. तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है और आने वाले दिनों में इसका असर आम लोगों तक पहुंच सकता है. अगर मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में देशभर के लोगों की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल बाजार की गतिविधियों पर बनी हुई हैं.
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