Petrol-Diesel Prices Update: दुनिया इस समय एक बड़े ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है और इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है. कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव में भी तेजी देखी जा रही है. भारत में भी बीते कुछ दिनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद आम लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. बीते 10 दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी की जा चुकी है.
लगातार बढ़ते दामों की वजह से कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर भीड़ दिखाई देने लगी, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई. हालांकि वैश्विक तुलना की जाए तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. बताया जा रहा है कि दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रही है, जबकि अन्य देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी तेज उछाल दर्ज किया गया है.
भारत में तीन चरणों में बढ़ी कीमतें
जानकारी के अनुसार फरवरी से मई 2026 के बीच वैश्विक हालात और कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता के चलते कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया. भारत में लंबे अंतराल के बाद 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहली बढ़ोतरी की गई, जिसमें प्रति लीटर लगभग 3 रुपये तक की वृद्धि हुई.
इसके बाद 19 मई को दूसरी बार औसतन 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए. फिर 23 मई को पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इन तीन चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 4.80 रुपये से 5 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई.
दूसरे देशों में कितना बढ़ा ईंधन का दबाव
वैश्विक स्तर पर कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारत की तुलना में काफी अधिक बढ़ोतरी देखी गई है. म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 89.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो सूची में सबसे अधिक बताई जा रही है. पाकिस्तान में यह बढ़ोतरी लगभग 54.9% रही, जबकि संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 52.4% का इजाफा हुआ. अमेरिका में कीमतें लगभग 44.5% तक बढ़ीं. नेपाल में 38.2%, चीन में 21.7% और ब्रिटेन में लगभग 19.2% तक की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं भारत में कुल बढ़ोतरी लगभग 5 प्रतिशत बताई जा रही है.
सरकार ने कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए क्या कदम उठाए?
बताया गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बावजूद भारत में लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई. जानकारी के अनुसार करीब 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. इस दौरान देश की तेल कंपनियों ने भी आर्थिक दबाव का सामना किया ताकि आम लोगों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े. बताया गया है कि मार्च 2026 के दौरान सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे कदम भी उठाए थे, जिससे कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिली.
दुनिया के कई देशों में बढ़ा ईंधन संकट
दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतें लगातार नए स्तर छू रही हैं. लंदन में पेट्रोल की कीमतें 190 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचने की बात कही जा रही है. वहीं यूरोपीय देशों में भी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बताया जा रहा है कि दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल इस समय हांगकांग में बिक रहा है, जहां कीमतें करीब 300 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं. वहीं नीदरलैंड्स में भी पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 245 से 255 रुपये प्रति लीटर तक बताई जा रही है.
आम लोगों की चिंता बढ़ी, आगे की स्थिति पर नजर
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव का असर सीधे परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है. ऐसे में आम लोग आने वाले दिनों पर नजर बनाए हुए हैं. यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
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