PLI Scheme Food Processing: केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम फॉर फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री (PLISFPI) का असर अब देश के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. सरकार ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना ने उत्पादन क्षमता, निवेश, रोजगार और निर्यात—सभी प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है. बढ़ती घरेलू मांग, वैश्विक स्तर पर भारतीय खाद्य उत्पादों की स्वीकार्यता और नीति समर्थन के चलते यह सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. ऐसे में PLISFPI स्कीम इस बदलाव की प्रमुख ताकत बनकर उभरी है.
उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा
सरकार के अनुसार, इस स्कीम के चलते देश में फूड प्रोसेसिंग और प्रिजर्वेशन क्षमता में करीब 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की वृद्धि हुई है. यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि भारत अब बड़े पैमाने पर प्रोसेस्ड फूड उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और घरेलू जरूरतों के साथ निर्यात क्षमता को भी मजबूत कर रहा है.
निवेश और इंसेंटिव से मिला बूस्ट
इस योजना के तहत लाभार्थी कंपनियों को अब तक 2,162.55 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया जा चुका है. सरकार ने कुल 165 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिसके जरिए लगभग 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हुआ है. यह निवेश नई तकनीकों के इस्तेमाल, उत्पादन क्षमता विस्तार और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है.
रोजगार सृजन में लक्ष्य से आगे
इस स्कीम का सबसे बड़ा असर रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिला है. सरकार के अनुसार, इसके तहत करीब 3.39 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं, जो तय लक्ष्य 2.5 लाख से काफी अधिक है. यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है.
MSME सेक्टर को मिला बड़ा सहारा
PLISFPI स्कीम ने एमएसएमई सेक्टर को भी मजबूत आधार दिया है. स्वीकृत 165 आवेदनों में से 69 एमएसएमई से जुड़े हैं, जबकि प्रमुख कंपनियों से संबंधित 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भी एमएसएमई श्रेणी में आती हैं. इससे यह साफ होता है कि छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़े उद्योगों के साथ जोड़कर पूरी सप्लाई चेन को मजबूत किया गया है. इसके अलावा, सरकार ने 20 पात्र एमएसएमई को 13.26 करोड़ रुपए का इंसेंटिव भी दिया है, जिससे उन्हें उत्पादन बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में मदद मिली है.
उत्पादन और विस्तार का बड़ा लक्ष्य
करीब 10,900 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ लागू इस स्कीम का लक्ष्य वित्त वर्ष 2021-22 से 2026-27 के बीच 33,494 करोड़ रुपए के प्रोसेस्ड फूड उत्पादन को हासिल करना है. यह लक्ष्य भारत को वैश्विक फूड प्रोसेसिंग बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सेक्टर की लगातार बढ़ती ताकत
भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है. सकल मूल्य वर्धित (GVA) 2014-15 में 1.34 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 2.24 लाख करोड़ रुपए हो गया है. यह वृद्धि दर्शाती है कि इस सेक्टर में उत्पादन और मांग दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं.
निर्यात में बढ़ती हिस्सेदारी
वैश्विक स्तर पर भी भारत की स्थिति मजबूत हो रही है. कृषि निर्यात में प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी 2014-15 में 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 20.4 प्रतिशत हो गई है. यह संकेत देता है कि भारतीय फूड प्रोडक्ट्स की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है.
स्कीम का व्यापक उद्देश्य
दरअसल, PLISFPI स्कीम का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश में फूड प्रोसेसिंग विनिर्माण को मजबूत करना, एमएसएमई सेक्टर में नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और भारतीय खाद्य उत्पादों को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करना भी है. इस योजना के जरिए सरकार पूरी वैल्यू चेन को मजबूत कर भारत को एक प्रमुख फूड प्रोसेसिंग हब बनाने की दिशा में काम कर रही है.
कुल मिलाकर, PLISFPI स्कीम देश के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को नई दिशा और गति दे रही है. उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी, निवेश आकर्षण, रोजगार सृजन और निर्यात में उछाल यह दर्शाते हैं कि आने वाले वर्षों में यह सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में शामिल हो सकता है.
यह भी पढ़े: ईरानी गोलीबारीः होर्मुज में फंसे कई भारतीय मालवाहक जहाज, नौसेना ने उठाया ये कदम