PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) 11 अक्टूबर 2026 को अपना एक साल पूरा कर रही है. इस योजना का मकसद देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों में उनकी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है. सरकार की ओर से शनिवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, किसानों को ऋण उपलब्ध कराने और फसल कटाई के बाद जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है.
छह साल के लिए मंजूर हुई थी योजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को छह वर्षों के लिए मंजूरी दी थी. पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को इसकी औपचारिक शुरुआत की थी. योजना को लागू करने के लिए 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को जोड़ा गया है. इसके साथ ही राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए भी कृषि विकास से जुड़े प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिलों की जरूरतों के अनुसार काम किया जा सके.
डैशबोर्ड से हो रही जिलों की प्रगति की निगरानी
योजना की निगरानी के लिए अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में डैशबोर्ड शुरू किया गया था. नवंबर 2025 से मासिक आउटपुट इंडिकेटर यानी प्रगति के प्रत्यक्ष संकेतकों के आधार पर जिलों की रैंकिंग भी शुरू हुई. इससे सभी 100 जिलों में चल रहे कार्यों की प्रगति पर नजर रखने की व्यवस्था बनी. सरकार की फैक्टशीट के अनुसार, योजना में शामिल सभी 100 जिलों ने जिला कृषि योजनाएं (डीएपी) तैयार कर ली हैं और उनके क्रियान्वयन का काम जारी है.
योजना की समीक्षा और निगरानी के लिए राज्य, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां गठित की गई हैं. इसके अलावा, सभी 100 जिलों ने अगस्त 2026 तक के आउटपुट इंडिकेटर से जुड़े आंकड़े जमा किए हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए परिणाम संकेतकों के आंकड़े भी सभी जिलों ने प्रस्तुत कर दिए हैं. केंद्रीय नोडल अधिकारी नियमित रूप से योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और जिलों को जरूरी मार्गदर्शन दे रहे हैं.
सीएसआर के जरिए भी जिलों को मिलेगी मदद
योजना के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं. सार्वजनिक उद्यम विभाग ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) की FY26-27 और 2027-28 की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों में धन-धान्य कृषि योजना के जिलों को अपनाने की व्यवस्था को शामिल किया है.
अप्रैल से अगस्त तक औसत स्कोर में बड़ा सुधार
योजना की प्रगति का आकलन करने के लिए तय छह उद्देश्यों के आधार पर 100 जिलों के औसत स्कोर में सुधार दर्ज किया गया है. फैक्टशीट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में यह औसत स्कोर 18.85 था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 46.89 हो गया. इस तरह इन चार महीनों में औसत स्कोर में 28.04 अंकों की बढ़ोतरी हुई.
एफपीओ संगम में किसानों ने साझा किए अनुभव
योजना के पहले वर्ष में किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को अपने अनुभव साझा करने और नए अवसरों पर चर्चा करने के लिए मंच भी उपलब्ध कराए गए. दिसंबर 2025 में आयोजित पीएम-डीडीकेवाई एफपीओ संगम में 15 राज्यों और योजना के 33 जिलों के 72 से अधिक किसान उत्पादक संगठनों ने हिस्सा लिया.
इस कार्यक्रम में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, बाजार तक पहुंच मजबूत करने और किसानों की आय में सुधार से जुड़े अनुभव साझा किए गए. साथ ही प्राकृतिक खेती, तिलहन उत्पादन, मधुमक्खी पालन, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, संस्थागत वित्त और डिजिटल कृषि जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई.
यह भी पढ़े: ‘पहले बेटियों के लिए चौखट लांघना था मुश्किल, आज…’, CM योगी बोले- ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ पर जोर