PM Vishwakarma Yojana: देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को अपने हुनर के साथ आगे बढ़ने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता देने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना ने लॉन्च होने के तीन साल के भीतर ही 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है. योजना के तहत कारीगरों को सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि टूलकिट, ऋण सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. बुधवार को जारी फैक्टशीट में योजना की प्रगति से जुड़ी यह जानकारी दी गई.
24.37 लाख से अधिक कारीगरों को मिला प्रशिक्षण
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत अब तक 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इसके अलावा 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को टूलकिट प्रदान की गई हैं. कारीगरों को कच्चा माल खरीदने, औजारों को बेहतर बनाने और अपने कारोबार का विस्तार करने में मदद देने के लिए करीब 5,316 करोड़ रुपये के 6.19 लाख से अधिक ऋण मंजूर किए गए हैं.
8.11 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन
योजना के तहत डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भी लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. अब तक 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन दिया गया है. इसके तहत 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है.
एआई टूल्स के इस्तेमाल की भी दी जा रही ट्रेनिंग
कारीगरों को बदलते बाजार के हिसाब से तैयार करने के लिए ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग में एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अब तक 12,000 से अधिक कारीगरों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया गया है.
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़े गए 30 हजार से अधिक कारीगर
कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बड़े बाजार तक पहुंच दिलाने के लिए उन्हें अलग-अलग ई-कॉमर्स मंचों से भी जोड़ा जा रहा है. बयान के मुताबिक, 30,000 से अधिक विश्वकर्मा लाभार्थियों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जीईएम, ओएनडीसी, मीशो, अमेजन, फैबइंडिया और सुलेखा समेत विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है.
देशभर में आयोजित हुए जागरूकता कार्यक्रम और मेले
योजना की जानकारी और इसके लाभ कारीगरों तक पहुंचाने के लिए देशभर में 1,500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम और शिविर आयोजित किए गए हैं. इसके अलावा 50 से अधिक कार्यशालाएं, 82 व्यापार मेले, 37 राज्य स्तरीय प्रदर्शनियां और 50 से अधिक फ्लैश मॉब आयोजित किए गए हैं.
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों पर है फोकस
भारत के पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार अपने हाथों के हुनर, परिवार से मिले ज्ञान और छोटे स्तर के कारोबार पर निर्भर रहते हैं. पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य ऐसे कारीगरों और शिल्पकारों को शुरुआत से लेकर कारोबार के आगे बढ़ने तक सहायता उपलब्ध कराना है. यह योजना गुरु-शिष्य परंपरा और पारंपरिक कौशल की परिवार आधारित प्रथा को मजबूत करने और उसे संरक्षित रखने का भी प्रयास करती है.
प्रमाणपत्र और पहचान पत्र के जरिए मिलती है मान्यता
पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र के जरिए मान्यता दी जाती है. कौशल उन्नयन के तहत कारीगरों को आधुनिक औजारों, बेहतर कार्यप्रणालियों और नए डिजाइन से परिचित कराया जाता है. प्रशिक्षण में डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी भी शामिल होती है.
5 से 7 दिन का बुनियादी प्रशिक्षण
योजना के तहत बुनियादी प्रशिक्षण की अवधि 5 से 7 दिन होती है. वहीं उन्नत प्रशिक्षण को 15 दिन या उससे अधिक समय में पूरा किया जा सकता है. प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को हर दिन 500 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है. योजना के तहत मार्केटिंग सहायता में व्यापार मेले, प्रदर्शनियां, ब्रांडिंग, जीईएम जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विज्ञापन और प्रचार शामिल हैं. इसका उद्देश्य कारीगरों को औपचारिक कारोबारी तौर-तरीके अपनाने के साथ-साथ अपने उत्पादों को बड़े और व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
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