Q3 FY26 Results India: चालू वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में आए शुरुआती नतीजों में भारतीय कॉर्पोरेट जगत की बड़ी कंपनियों (इंडिया इंक) का प्रदर्शन कुछ कमजोर दिखाई दिया है. इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, नए श्रम कानूनों से जुड़े एकमुश्त शुल्क और अन्य बदलावों के कारण कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बना है. अब तक निफ्टी50 की लगभग 10 कंपनियों ने अपने तिमाही नतीजे घोषित किए हैं, जिनमें अधिकतर आईटी कंपनियां और कुछ बैंक शामिल हैं. विश्लेषकों का कहना है कि इन नतीजों में कोई बड़ा चौंकाने वाला संकेत नहीं मिला और ज्यादातर कंपनियों का प्रदर्शन या तो मिला-जुला रहा या बाजार की उम्मीदों से कम रहा.
नए श्रम कानूनों से मुनाफे पर सबसे ज्यादा असर
कंपनियों की कमाई पर सबसे बड़ा असर नए श्रम कानून के लागू होने से पड़ा है. यह कानून नवंबर से लागू हुआ है, जिसमें वेतन, कार्यस्थल की सुरक्षा और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े कई बदलाव किए गए हैं. इन बदलावों को लागू करने में कंपनियों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा. टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों को नियमों के कार्यान्वयन से जुड़े एकमुश्त शुल्क के रूप में 4,373 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा, जिससे इस तिमाही में मुनाफे में तेज गिरावट दर्ज की गई.
आईटी सेक्टर में एआई से मांग और ग्रोथ की उम्मीद
हालांकि अल्पावधि में मुनाफे पर दबाव बना हुआ है, लेकिन आईटी कंपनियों के लिए मांग का माहौल धीरे-धीरे बेहतर होता नजर आ रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कंपनियों के रोज़मर्रा के कामकाज का हिस्सा बनता जा रहा है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स और भर्ती के अवसर बढ़ रहे हैं. कई बड़ी आईटी कंपनियों ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपनी आय के अनुमानों में संशोधन या बढ़ोतरी की है. प्रबंधन का भी मानना है कि एआई के चलते आगे ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत हैं.
RBI के फैसलों से बैंकिंग सेक्टर पर दबाव
बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो Reserve Bank of India के कुछ फैसलों, जैसे प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और कृषि से जुड़े कर्ज नियमों में बदलाव, का असर बैंकों की कमाई पर पड़ा है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह असर अस्थायी है और आगे स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है.
NBFC, ऑटो और मेटल कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
विश्लेषकों के अनुसार, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां, ऑटो कंपनियां और नॉन-फेरस मेटल कंपनियां इस रिजल्ट सीजन में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं. अब तक नतीजे घोषित करने वाली कंपनियों में टीसीएस, इंफोसिस, HCL टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, विप्रो, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 भारत के लिए गोल्डीलॉक्स ईयर साबित हो सकता है. अच्छी आर्थिक वृद्धि, ब्याज दरों में संभावित कटौती, रुपये की स्थिरता और वैश्विक जोखिमों में कमी से शेयर बाजार को समर्थन मिल सकता है.
निफ्टी आउटलुक: FY27 में कमाई 16% बढ़ने का अनुमान
विशेषज्ञों के अनुसार, आगे चलकर मेटल्स, बैंकिंग-फाइनेंस, कैपिटल गुड्स और डिफेंस सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. HDFC Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी की कमाई में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. रिपोर्ट में 2026 के लिए करीब 11 प्रतिशत रिटर्न की उम्मीद जताई गई है, जबकि साल के अंत तक निफ्टी का लक्ष्य 28,720 रखा गया है.
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