RBI GDP Growth Forecast: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर नया अनुमान जारी किया है. केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6% रखा है. हालांकि आरबीआई ने साथ ही चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई चेन में लगातार बनी रहने वाली बाधाएं, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता, बढ़ती लागत और मौसम से जुड़े जोखिम आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल सकते हैं.
GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया गया
मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “इस वर्ष वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है.” तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के बाद उन्होंने कहा, “पहले हमने 6.9 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। अब पहली तिमाही के लिए 6.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही के लिए 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत का अनुमान है.”
विनिर्माण और सेवा क्षेत्र बने हुए हैं मजबूत
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि दोनों सेक्टर मजबूत बने हुए हैं. कारोबारियों का भरोसा भी सकारात्मक बना हुआ है और मांग में अच्छी स्थिति देखने को मिल रही है. उन्होंने बताया कि निजी खपत अभी भी मजबूत बनी हुई है, जिसे उपभोक्ताओं के बढ़ते खर्च से समर्थन मिल रहा है. इसके अलावा लागत बढ़ने के बावजूद निजी और सरकारी निवेश में भी अच्छी गति बनी हुई है.
निर्यात क्षेत्र से मिल रहा सहारा
आरबीआई के अनुसार अप्रैल 2026 में माल निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि माल ढुलाई और बीमा लागत अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि सेवाओं का निर्यात भी मजबूत बना हुआ है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर वैश्विक चिंताओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सेवाओं की मांग बरकरार है, जिससे अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है.
पश्चिम एशिया तनाव का असर सीमित
गवर्नर ने कहा कि अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अन्य वैश्विक चुनौतियों के प्रभाव को काफी हद तक झेला है. हालांकि बढ़ती लागत का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है.
महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत लगाया है. तिमाही आधार पर पहली तिमाही में महंगाई 4.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है.
तीसरी तिमाही में बढ़ सकता है दबाव
केंद्रीय बैंक का मानना है कि फिलहाल महंगाई आरबीआई के लक्ष्य स्तर से नीचे बनी हुई है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर अभी घरेलू बाजार तक नहीं पहुंचा है. हालांकि आरबीआई ने संकेत दिया है कि तीसरी तिमाही में महंगाई ऊपरी सहनशील सीमा के करीब पहुंच सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है.
कोर इंफ्लेशन पर भी नजर
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोर इंफ्लेशन का अनुमान 4.7% लगाया है. केंद्रीय बैंक के अनुसार वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट, कमोडिटी कीमतों में तेजी, मानसून की अनिश्चितता और अल नीनो जैसे कारक महंगाई के लिए ऊपर की ओर जोखिम पैदा कर सकते हैं.
मानसून और अल नीनो को लेकर चिंता
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो की संभावना भी अर्थव्यवस्था और महंगाई के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और जलाशयों में संतोषजनक जल स्तर कुछ राहत प्रदान करते हैं.
अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा
आरबीआई का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती लागत के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है. मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां, निर्यात और सेवा क्षेत्र की स्थिरता देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मौसम से जुड़े जोखिमों पर लगातार नजर रखी जाएगी.
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