सपाट खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स में 200 अंकों से ज्यादा की बढ़त 

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sensex opening Bell: कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनावों को लेकर नई चिंताओं के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ सपाट खुला. बाजार खुलने पर बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,151.04 के मुकाबले 48.65 अंक चढ़कर 74,199.69 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 27.75 अंक या 0.12 प्रतिशत चढ़कर 22,964.50 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 22,936.75 पर बंद हुआ था.

वहीं, दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 0.27 प्रतिशत यानी 206.51 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 74,357.55 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 0.25 प्रतिशत की तेजी दर्ज करते हुए 22,994.70 का उच्चतम स्तर छुआ. इस दौरान, निफ्टी 50 इंडेक्स में ट्रेंट में सबसे ज्यादा 5.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. इसके बाद इंडिगो, सन फार्मा, इंफोसिस, इटरनल और टीसीएस के शेयरों का स्थान रहा. इसके विपरीत, कोल इंडिया, बीईएल और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.

निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.54 प्रतिशत और 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई, जबकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई. इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी में भी गिरावट देखने को मिली.

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंताओं ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है. यही कारण है कि एशियाई बाजारों में भी दबाव बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है. रिपोर्टों के अनुसार, 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है.

विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली हाल के दिनों में कम हुई है और बीच-बीच में खरीदारी भी देखने को मिली है, लेकिन मौजूदा बाजार संरचना अभी भी बड़ी तेजी के लिए अनुकूल नहीं दिखती. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले सप्ताह मार्जिन फंडिंग पर आधारित लंबी पोजिशनों की जबरन बिकवाली के बाद स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट आई थी. अब उसी सेगमेंट में कुछ रिकवरी दिखाई दे रही है, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) और खुदरा निवेशक उच्च वैल्यूएशन के बावजूद चुनिंदा ग्रोथ स्टॉक्स में खरीदारी कर रहे हैं.

 

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