Sensex opening Bell: वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला. यह लगातार पांचवां दिन है जब घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स 72,990.04 पर खुला, जो अपने पिछले बंद भाव 73,123.83 से 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,600.00 से 75.59 अंक यानी 0.33 प्रतिशत लुढ़ककर 22,524.40 पर खुला.
वहीं दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 609.25 अंकों यानी 0.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,514.57 का निम्नतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 212.65 अंक या 0.94 प्रतिशत फिसलकर 22387.35 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया. व्यापक बाजार में निफ्टी मिड-कैप 100 और स्मॉल कैप दोनों में क्रमशः 0.81 प्रतिशत और 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
एनएसई पर अधिकांश सूचकांकों में गिरावट
वहीं सेक्टरवार देखें तो, एनएसई पर अधिकांश सूचकांकों में गिरावट देखी गई, जिनमें निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी आईटी शीर्ष गिरावट वाले सूचकांक रहे, जिनमें 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, निजी बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली. निफ्टी प्राइवेट बैंक लगभग 0.49 प्रतिशत चढ़ा, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ सहारा दिया.
बाजार की दिशा का अंदाजा लगाने के लिए निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक और सितंबर तिमाही के नतीजों पर नजर रखेंगे. व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन भविष्य की नीतिगत दिशा पर उसका मार्गदर्शन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह को प्रभावित कर सकता है.
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में मामूली नरमी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हाल के दिनों में मामूली नरमी जरूर आई है, लेकिन वे अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. ऐसे में शेयर बाजार में किसी मजबूत और टिकाऊ तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है. उनका मानना है कि हालिया गिरावट के बाद कई शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हुए हैं, लेकिन निवेशकों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े व्यापक आर्थिक जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

