Share Market Today 8 July 2026: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा कमजोर वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजार पर दिखाई दिया. शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 77,816 के स्तर पर खुला. वहीं एनएसई के निफ्टी 50 ने 139 अंकों की कमजोरी के साथ 24,259 के स्तर से कारोबार की शुरुआत की. वैश्विक बाजारों में बिकवाली, एशियाई सूचकांकों की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है.
आईटी शेयरों में खरीदारी, इन दिग्गज शेयरों पर दबाव
कमजोर बाजार के बीच आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. Infosys और TCS जैसे आईटी शेयर शुरुआती कारोबार में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी तरफ Trent Ltd के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली और यह करीब 12.44 प्रतिशत तक टूट गया. इसके अलावा Adani Enterprises, Reliance Industries और Adani Ports जैसे बड़े शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव नजर आया. बाजार की मौजूदा चाल से साफ है कि निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों को लेकर सतर्क बने हुए हैं.
एशियाई बाजारों में भी गिरावट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है. बुधवार को प्रमुख एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. जापान का निक्केई 225 करीब 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में 0.72 प्रतिशत तक नीचे आया. हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,496.89 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
टॉपिक्स इंडेक्स में भी करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. वहीं चीन का शंघाई कम्पोजिट 1.26 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 3,990.23 के आसपास कारोबार कर रहा था. एशियाई बाजारों की यह कमजोरी निवेशकों के घटते जोखिम उठाने के रुझान को दिखाती है. भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर आम तौर पर निवेशक जोखिम वाले एसेट्स को लेकर अधिक सतर्क हो जाते हैं.
वॉल स्ट्रीट से मिले कमजोर संकेत
भारतीय बाजार को अमेरिकी शेयर बाजार से भी कमजोर संकेत मिले. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी बाजार के प्रमुख टेक्नोलॉजी तथा सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली का असर वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया. दिए गए आंकड़ों के अनुसार, डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 130.76 अंक यानी 0.25 प्रतिशत गिरा. नैस्डैक कम्पोजिट 1.16 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,818.69 पर आ गया. वहीं S&P 500 में 0.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 7,503.85 के स्तर पर बंद हुआ. माइक्रोन और एनवीडिया जैसी बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने भी अमेरिकी बाजार पर दबाव बढ़ाया.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी निवेशकों की चिंता
बाजार की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी चिंताओं में मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई किए जाने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी. इस घटनाक्रम के बाद निवेशक संभावित सैन्य टकराव, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को लेकर सतर्क हो गए हैं. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा कोई भी तनाव कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
कच्चे तेल में तेज उछाल, ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में बीते दो दिनों के दौरान क्रूड ऑयल की कीमतों में 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी बताई गई है. ब्रेंट क्रूड 2.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76.04 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 2.31 प्रतिशत उछलकर 72.25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े स्तर पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है. ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी घरेलू महंगाई, आयात लागत और रुपये की चाल को लेकर चिंता बढ़ा सकती है.
डॉलर इंडेक्स में मामूली तेजी
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY में मामूली मजबूती देखने को मिली. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स 0.01 प्रतिशत बढ़कर 100.89 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. डॉलर इंडेक्स प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी को दर्शाता है. इसमें यूरो, जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड, स्विस फ्रैंक, स्वीडिश क्रोना और कनाडाई डॉलर जैसी प्रमुख मुद्राएं शामिल होती हैं.

