साल 2025 में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में करीब 170% की जबरदस्त तेजी देखने को मिली. इसके बाद घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चांदी में तेजी का रुझान आगे भी जारी रह सकता है और वर्ष 2026 में यह नए शिखर छू सकती है. मोतीलाल ओसवाल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चांदी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कीमती धातु बनकर उभरी है. इसने न सिर्फ सोने को पछाड़ा, बल्कि कई अन्य प्रमुख निवेश विकल्पों से भी बेहतर रिटर्न दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि चांदी और सोने की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार रहे हैं.
Silver में बड़ा दांव
इनमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ता तनाव, व्यापार को लेकर अनिश्चितता, आसान मौद्रिक नीतियां, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में ज्यादा निवेश, आपूर्ति की कमी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग शामिल हैं. मोतीलाल ओसवाल ने वर्ष 2026 के लिए एमसीएक्स चांदी का लक्ष्य 3.20 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तय किया है. जोखिम प्रबंधन के लिए चांदी का स्टॉप-लॉस स्तर 1.40 लाख रुपए प्रति किलो तय किया गया है. मौजूदा भाव करीब 2.52 लाख रुपए को देखते हुए, इसमें आगे लगभग 27% तक और बढ़त की गुंजाइश बताई जा रही है.
ब्रोकरेज के टारगेट से दोगुनी रफ्तार से बढ़ी चांदी
एक्सचेंजों पर चांदी का भंडार लगातार कम होने से भी कीमतों को सहारा मिला है. ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, उसके पहले बताए गए टारगेट प्राइस उम्मीद से कहीं पहले ही पूरे हो गए. 2025 की शुरुआत में कंपनी ने अनुमान लगाया था कि साल के अंत तक सोना 84,000 रुपए और चांदी 1,10,000 रुपए तक पहुंच सकती है. हालांकि, सोना पहली ही तिमाही में 84,000 के स्तर को पार कर गया और बाद में बढ़कर 1,40,465 रुपए के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. वहीं, चांदी दूसरी तिमाही तक 88,000 रुपए के पार चली गई और बाद में 2,54,000 रुपए के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.
क्यों चांदी ने सोने को पीछे छोड़ा?
यह ब्रोकरेज के शुरुआती अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा था. मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि इसकी दोहरी भूमिका है. यह एक कीमती धातु भी है और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली धातु भी. जहां वैश्विक अनिश्चितताओं ने चांदी को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत किया, वहीं उद्योगों में इसके बढ़ते उपयोग ने इसकी मांग को और तेज कर दिया. ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, वर्ष 2025 में चांदी की औद्योगिक मांग अब तक के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.
मांग ज्यादा, आपूर्ति कम
इसके पीछे सौर ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी, इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल, बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार और पावर ग्रिड में बढ़ते निवेश जैसे कारक रहे. इस मजबूत मांग के चलते लगातार पांचवें साल चांदी की खपत उसकी आपूर्ति से अधिक रही, जिससे बाजार में कमी बनी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी असंतुलन की वजह से कुछ समय के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जो यह संकेत देता है कि बाजार में चांदी की वास्तविक उपलब्धता सीमित होती जा रही है.
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