CBSE का स्कूलों को चेतावनी! कक्षा 6 के लिए 31 मई तक चुनें तीसरी भाषा, जानें क्या है R1, R2, R3 भाषा सिस्टम?

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CBSE 3-Language Formula: CBSE बोर्ड से जुड़े स्कूलों के छात्र अब अपनी मातृभाषा के साथ-साथ संस्कृत, फ्रेंच या जर्मन जैसी नई भाषाएं सीख सकेंगे. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (C.B.S.E.) ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत सभी संबद्ध स्कूलों को अहम निर्देश जारी किए हैं. बोर्ड ने स्कूलों को छठी कक्षा के लिए ‘तीसरी भाषा’ के विकल्प को 31 मई तक अंतिम रूप देने को कहा है.

3 भाषाओं की करनी होगी पढ़ाई 

इस कदम का उद्देश्य छात्रों को भाषाई रूप से समृद्ध बनाना और विभिन्न संस्कृतियों से जोड़ना है. इस नए ढांचे के तहत छात्रों को अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 3 भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी. इसमें कम-से-कम 2 भारतीय भाषाओं का चुनाव करना अनिवार्य होगा. तीसरी भाषा के रूप में छात्र किसी भी अन्य भारतीय या विदेशी भाषा को चुन सकते हैं. यह नियम मुख्य रूप से कक्षा 6 से प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है.

डिजिटल माध्यमों का उपयोग

बोर्ड ने 31 मई की समय सीमा इसलिए तय की है ताकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर छात्रों को किताबों और चुनाव के लिए पर्याप्त समय मिल सके. स्कूलों को न केवल भाषाओं का चयन करना है, बल्कि योग्य शिक्षकों और संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी. बोर्ड ने सुझाव दिया है कि शिक्षक की कमी होने पर स्कूल स्थानीय संसाधनों या डिजिटल माध्यमों (डिजिटल मीडिया) का उपयोग कर सकते हैं.

छात्रों की तर्क शक्ति और मानसिक विकास में सुधार

इस बदलाव से छात्र अपनी मातृभाषा के साथ-साथ संस्कृत, फ्रेंच या जर्मन जैसी नई भाषाएं सीख सकेंगे. इससे छात्रों की तर्क शक्ति और मानसिक विकास में सुधार होगा, जो उन्हें भविष्य में ग्लोबल लेवल पर करियर बनाने में मदद करेगा. नई शिक्षा नीति के तहत, स्कूलों को भाषाई विविधता (तीसरी भाषा) के लिए 31 मई तक का समय दिया गया है.

क्या है CBSE का R1, R2, R3 भाषा सिस्टम?

सीबीएसई की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के तहत आर1, आर2 और आर3 भाषाएं हैं जिनमें आर 1 का मतलब प्रथम भाषा, आर 2 का मतलब प्रथम भाषा से अलग भारतीय भाषा जिसमें स्थानीय भाषा शामिल हो सकती है और आर 3 का मतलब विदेशी भाषा है जिसमें अंग्रेजी भाषा शामिल हो सकती है. सीबीएसई की नई भाषा नीति में दो भारतीय भाषाओं का होना जरूरी है. इसके अलावा तीसरी भाषा विदेशी हो सकती है.

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