US के नए वीजा नियमों से बढ़ी भारतीय छात्रों की चिंता, विरोध तेज, भारत के विदेश मंत्रालय से मिला आश्वासन

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Washington: अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों को बडा झटका लगा है. आने वाले महीनों में एक नई चुनौती का सामना करना पड सकता है. अमेरिकी सरकार की ओर से प्रस्तावित नए छात्र वीजा नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के एक प्रमुख नीति समूह ने गंभीर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि यदि ये नियम लागू होते हैं तो कई अंतरराष्ट्रीय खासकर, भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई या रिसर्च पूरी होने से पहले ही अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है.

समय सीमा तय करने का प्रस्ताव

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में एफ-1 (F-1) और जे-1 (J-1) वीजा पर रहने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अधिकतम चार वर्ष की समय सीमा तय करने का प्रस्ताव है. यदि यह नियम 15 सितंबर से लागू होता है, तो उन छात्रों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है जिनके कोर्स या शोध कार्य को पूरा होने में चार साल से अधिक समय लगता है. कई स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रम तय अवधि से अधिक समय लेते हैं. ऐसे में छात्रों को पढ़ाई अधूरी छोड़ने या फिर वीजा विस्तार की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है.

पूरे मामले पर नजर

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और भारतीय छात्रों तथा यात्रियों को होने वाली संभावित परेशानियों को कम करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ लगातार संपर्क में है. मंत्रालय का कहना है कि भारतीय छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं. प्रवासी भारतीयों के नीति संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड Indian Diaspora Studies (FIIDS) ने इन प्रस्तावित नियमों का विरोध करते हुए अमेरिकी सांसदों और यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) से इन्हें तत्काल रोकने की अपील की है.

समय सीमा वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं

संगठन के पॉलिसी प्रमुख खंडेराव कंद का कहना है कि चार साल की समय सीमा वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है. उनका तर्क है कि अमेरिका में स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी करने में औसतन 52 महीने लगते हैं, जबकि पीएचडी जैसे शोध कार्यक्रमों में औसतन 5.7 वर्ष का समय लगता है. ऐसे में तय की गई चार साल की सीमा हजारों छात्रों के भविष्य पर असर डाल सकती है.

भारतीयों की संख्या सबसे अधिक

अमेरिका में पढ़ाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है. हर वर्ष करीब 3.63 लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए अमेरिका जाते हैं. कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत बताई जाती है. यदि नए नियम लागू होते हैं, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका है. कई छात्र ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिला लेते हैं जिनकी अवधि चार साल से अधिक होती है या शोध कार्य के कारण पढ़ाई लंबी हो जाती है.

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