Azamgarh Encounter: आजमगढ़ के अहरौला इलाके के शंभूपुर गांव में मंगलवार की शाम एक परिवार के घर चल रही पूजा अचानक खौफनाक घटना में बदल गई. कुछ दिनों से यहां धार्मिक अनुष्ठान और झाड़-फूंक चल रही थी. इसी दौरान घर के मालिक अरविंद सिंह और वहां मौजूद पंडितों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ और देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं.
पत्नी और पंडितों को मारी गोली
फायरिंग में अरविंद की पत्नी (Azamgarh Encounter) बबीता और पूजा कराने आए दो पंडितों महेंद्र पाठक व अखिलेश मिश्रा की जान चली गई. घटना के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया. पुलिस ने काफी देर तक उसे समझाकर बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए. इसी दौरान एक बेटे को गोली लग गई. गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई. बाद में पुलिस टीम ने कमरे में प्रवेश करने की कोशिश की तो कथित तौर पर अंदर से फायरिंग हुई. जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया और बाद में उसकी भी मौत हो गई.
अचानक क्यों बिगड़ी स्थिति? Azamgarh Encounter
घटना की सबसे अहम कड़ी उस वक्त सामने आती है जब अरविंद पूजा करा रहे लोगों से बातचीत करता है. बताया जा रहा है कि उसने पंडितों से पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे थे. इसी बात को लेकर बहस बढ़ी और मामला हाथापाई व गोलीबारी तक पहुंच गया. हालांकि, केवल यही विवाद इतनी बड़ी वारदात की वजह क्यों बना, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ हो पाएगी.
परिवार पहले से झेल रहा था कई मुश्किलें
अरविंद के परिवार की पुरानी कहानी भी कम दर्दनाक नहीं बताई जा रही है. उसकी मां शमला देवी के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद परिवार लगातार विवादों और आपराधिक घटनाओं से गुजर रहा था. परिवार का दावा है कि उस दौरान अरविंद की पत्नी से दुष्कर्म का मामला सामने आया था. इस मामले में परिवार के कुछ रिश्तेदारों पर आरोप लगाए गए थे. परिजनों के मुताबिक, अरविंद के अपहरण की घटना भी इसी दौर में हुई और उसे कई महीनों तक झारखंड में रखे जाने की बात सामने आई थी. इसके अगले साल परिवार को एक और बड़ा झटका लगा. अरविंद के भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की हत्या कर दी गई। इस मामले में भी परिवार के कुछ रिश्तेदारों के नाम सामने आने की बात कही गई थी. लगातार हुई इन घटनाओं ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया.
‘प्रेत बाधा’ की बात कहां से आई?
परिजनों के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद अरविंद लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान रहता था। परिवार का कहना है कि किसी धार्मिक व्यक्ति ने उसे कथित तौर पर ‘प्रेत बाधा’ से जोड़कर देखा और भाई की आत्मा से संबंधित बातें बताई गईं. इसके बाद घर में पूजा-पाठ और झाड़-फूंक शुरू कराई गई. घटना से पहले कई दिनों तक यही धार्मिक अनुष्ठान चलने की बात सामने आई है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘प्रेत बाधा’ से जुड़ी बात परिवार की ओर से बताई गई मान्यता है. इसे घटना का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता. असल वजह क्या थी, यह पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगी.
कमरे के अंदर क्या हुआ?
तीन लोगों की मौत के बाद अरविंद ने अपने बच्चों को कमरे के भीतर रखा. पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी. अधिकारियों ने बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की. लेकिन मामला और गंभीर तब हो गया, जब एक बच्चे को गोली लगने की सूचना मिली. इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने कमरे में प्रवेश करने की कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान अरविंद की ओर से गोली चली और जवाबी फायरिंग की गई. घायल अरविंद को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया.
अब परिवार में बचीं दो बेटियां और दादी
एक ही घटना ने परिवार के कई सदस्यों की जिंदगी उजाड़ दी. अरविंद की पत्नी, दो पंडित और उसका एक बेटा अब इस दुनिया में नहीं हैं. पीछे उसकी दो बेटियां और मां रह गई हैं. इस पूरे मामले में अब जांच का फोकस इस बात पर है कि पूजा के दौरान विवाद की वास्तविक वजह क्या थी, अरविंद की मानसिक स्थिति कैसी थी, पुराने पारिवारिक विवादों की भूमिका कितनी थी और घटना से पहले घर में चल रही पूजा-पाठ की पूरी पृष्ठभूमि क्या थी.