बांग्लादेश की अदालत का बड़ा फैसला: ढाका के पूर्व पुलिस प्रमुख सहित तीन अफसरों को मौत की सजा

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bangladesh: बांग्लादेश से बड़ी खबर सामने आई है. यहां की एक विशेष अदालत ने सोमवार को ढाका के पूर्व पुलिस आयुक्त और दो अन्य पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई. इन अधिकारियों को 2024 में सड़कों पर हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान उनकी कथित भूमिका के लिए यह सजा सुनाई गई है. इस विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) की तीन जजों की बेंच ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के पूर्व आयुक्त हबीबुर रहमान, पूर्व संयुक्त आयुक्त सुदीप कुमार चक्रवर्ती और अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद अख्तरुल इस्लाम को यह सजा सुनाई. बेंच की अध्यक्षता जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार कर रहे थे. इन तीनों पर यह फैसला उनकी गैर मौजूदगी में चलाए गए मुकदमे के बाद दिया गया.

यह पुनर्गठित आईसीटी-बीडी का दूसरा फैसला है. इससे पहले यह न्यायाधिकरण अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा सुना चुका है.

फैसले में कहा गया कि ये तीनों पुलिस अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर उच्च पद और अधिकार रखते थे. इसलिए, अगर उनके नीचे काम करने वालों ने कोई अपराध किया तो इन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है. इसे ‘वरिष्ठ कमान की जिम्मेदारी’ कहा जाता है. अदालत ने उन्हें दोषी पाया और सभी को एक ही सजा के तौर पर मौत की सजा सुनाई.

दो अधिकारियों, तीन कांस्टेबल को भी सजा

न्यायाधिकरण ने ढाका के सहायक पुलिस आयुक्त मोहम्मद इमरुल को 6 साल, निरीक्षक अरशद हुसैन को 4 साल और तीन कांस्टेबल सुजन हुसैन, इमाज हुसैन और नसीरुल इस्लाम को 3-3 साल की जेल की सजा भी सुनाई.

जिन तीन पूर्व पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है, उनमें सहायक आयुक्त इमरुल का मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला, क्योंकि न्यायाधिकरण ने पहले ही उन्हें फरार घोषित कर दिया था. बाकी आरोपियों ने अदालत में उपस्थित होकर मुकदमे का सामना किया.

जाने किस मामले में सुनाई गई मौत की सजा?

आरोपियों को आईसीटी-बीडी ने उस घटना में दोषी ठहराया, जिसमें 5 अगस्त 2024 को ढाका के चंखारपुल इलाके में पुलिस की गोलीबारी से 6 लोगों की मौत हो गई थी. उसी दिन तत्कालीन सरकार गिर गई थी.

आईसीटी-बीडी के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने जेल की सजा पाने वाले आरोपियों को दी गई सजा को ‘तुलनात्मक रूप से हल्की’ बताते हुए असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसी भी फैसले के बाद अदालत का धन्यवाद किया जाता है, लेकिन इस मामले में हम अपील दायर करेंगे.

आईसीटी-बीडी ने शेख हसीना को भी सुनाई थी मौत की सजा

बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने नवंबर में शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मौत की सजा सुनाई. यह फैसला छात्र आंदोलन पर उनकी सरकार की सख्त कार्रवाई से जुड़े मामलों के लंबे मुकदमे के बाद आया.

न्यायाधिकरण ने अवामी लीग नेता हसीना को उस हिंसक दमन का मुख्य साजिशकर्ता और प्रमुख सूत्रधार बताया, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हुई. 5 अगस्त 2024 को बड़े प्रदर्शन के बीच बांग्लादेश छोड़ने के बाद से शेख हसीना भारत में रह रही हैं.

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