फ्रांस: पेरिस में भारतीय मूल के युवक को 20 साल की जेल, जाने क्या था मामला

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Crime France: एक 29 वर्षीय भारतीय व्यक्ति को पेरिस की एक अदालत ने 20 साल की जेल की सजा सुनाई है. उस पर कम उम्र की लड़कियों (जिनमें से कई नाबालिग भी थीं) को यौन गतिविधियों के लिए मजबूर करने वाले एक समूह (पुरुष-समर्थक) का नेतृत्व करने का आरोप था. सरकारी टीवी नेटवर्क ‘फ्रांस 24’ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी रोहन राणे का मुकदमा सोमवार को पेरिस की एक विशेष आपराधिक अदालत में शुरू हुआ और इसकी सुनवाई बंद दरवाजों के पीछे की जा रही है.

रोहन राणे के निशाने पर कौन?

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि शुक्रवार को पेरिस की अदालत ने रोहन राणे को 20 साल की जेल की सजा सुनाई. वह पढ़ाई के लिए फ्रांस आया था. यहां वो एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क में शामिल था, जो अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में कमजोर बच्चों को निशाना बनाता था और उन्हें हिंसक व यौन वीडियो बनाने के लिए मजबूर करता था. हालांकि, अभियोजकों ने राणे के लिए 30 साल की जेल की सजा की मांग की थी. उन्होंने राणे को ‘नियो-नाजी’ बताया, जो ‘सैडिज्म’ (दूसरों को तकलीफ देकर मजा लेने की प्रवृत्ति) और भयानक हिंसा का शौकीन था.

अदालत को बताया गया कि राणे के नेतृत्व वाले समूह की दर्जनों पीड़ितों में से ज्यादातर अमेरिकी लड़कियां थीं. इनमें कई लड़कियों की उम्र 15 साल से भी कम थी. ‘फ्रांस 24’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पुरुष-प्रधान समूह के अन्य युवा पुरुष सदस्य अमेरिका, भारत, जर्मनी और न्यूजीलैंड से थे. छह लड़कियों ने (जिनकी उम्र अब 18 से 21 साल के बीच है) आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराईं. अभियोजकों ने बताया कि लगभग 20 पीड़ितों की पहचान की गई, लेकिन बाकियों से संपर्क नहीं हो सका.

तय हुए क्या आरोप?

मुख्य रूप से बंद दरवाजों के पीछे पांच दिनों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने राणे को अपराधों का दोषी पाया. इनमें संगठित गिरोह के हिस्से के तौर पर की गई जबरन वसूली शामिल थी, साथ ही पीड़ितों पर किए गए अत्याचार और बर्बरता जैसे गंभीर हालात भी शामिल थे. अभियोजकों ने कहा कि सभी लड़कियों को सीवीएलटी समूह ने बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाया था. यह समूह शून्यवाद (निहिलिज्म), नस्लवाद, यहूदी-विरोध, नाजी विचारधारा और मूल्यों तथा नारीवादियों और एलजीबीटीक्यू प्लस समुदाय के प्रति नफरत से प्रेरित था.

यह समूह कोविड-19 महामारी से पहले ‘डिस्कॉर्ड’ प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हुआ था और राणे इसका नेतृत्व करता था. स्पोर्ट्स कोच बनने से पहले, राणे फ्रांस के दक्षिणी शहर एंटीब्स में एक कमर्शियल स्कूल में पढ़ाई करने गया थे. राणे को सबसे पहले 2021 में फ्रांस में गिरफ्तार किया गया था. अमेरिकी अधिकारियों ने सीवीएलटी समूह में उनकी लीडरशिप और अपनी सैडिज्म (दूसरों को तकलीफ देकर खुशी पाने की इच्छा) को पूरा करने की उनकी चाहत के बारे में जानकारी दी थी.

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