Indonesia: लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने इंडोनेशिया में हिंसक रूप ले लिया है. शुक्रवार की देर रात गुस्साई भीड़ ने साउथ सुलावेसी प्रांत की राजधानी मकास्सार में स्थानीय संसद भवन को आग के हवाले कर दिया. इस घटना में जहां तीन लोगों की मौत हो गई, वही पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. आग में जलने और इमारत से कूदने की वजह से लोगों को चोटें आईं है. शनिवार की सुबह घटनास्थल से शव बरामद किए गए.
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, बताया गया कि पूरी इमारत आग की लपटों से घिर गई और रातभर क्षेत्र नारंगी रोशनी में डूबा रहा. इसके अलावा वेस्ट जावा के बांडुंग शहर में भी प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय संसद भवन में आग लगा दिया. सुराबाया शहर में गुस्साई भीड़ ने पुलिस मुख्यालय पर धावा बोला, वाहनों में आग लगई और बैरिकेड तोड़ दिए. पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पटाखों और लकड़ी की छड़ों से जवाब दिया.
शनिवार को जकारता में स्थिति कुछ हद तक सामान्य रही. सुरक्षा बलों ने जली हुई गाड़ियां, पुलिस चौकियां और बस स्टॉप हटाने का काम किया. दरअसल, प्रदर्शन की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब यह खुलासा हुआ था कि संसद के सभी 580 सांसदों को वेतन के अलावा हर महीने 50 मिलियन रुपये (करीब 3,075 डॉलर) आवास भत्ता दिया जा रहा है. यह राशि जकारता की न्यूनतम मजदूरी से लगभग दस गुना अधिक है. आलोचकों का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स बोझ झेल रहे आम नागरिकों के बीच इतना भारी भत्ता देना बेहद असंवेदनशील कदम है.
युवक अफ्फान कुर्नियावान की मौत से भड़का प्रदर्शन
प्रदर्शन तब और ज्यादा हिंसक हो गया, जब 21 वर्षीय अफ्फान कुर्नियावान की मौत की खबर सामने आई. वह फूड डिलीवरी करते समय जकारता में प्रदर्शन के बीच फंस गया था. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि नेशनल पुलिस की मोबाइल ब्रिगेड की एक बख्तरबंद गाड़ी भीड़ में घुस गई और अफ्फान को कुचल दिया. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सुरक्षा बलों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया. केवल जकारता में ही गुरुवार तक 951 लोगों को गिरफ्तार किया गया. मानवाधिकार आयोग (कोमनस हैम) ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की चोटिल संख्या पुलिस के बताए आंकड़ों से कहीं अधिक है.
इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इंडोनेशियाई सरकार की आलोचना की और कहा कि लोगों को प्रदर्शन करने पर हिंसा झेलनी पड़ रही है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है. संगठन ने मांग किया कि प्रदर्शन के अधिकार का उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को तत्काल रिहा किया जाए. अधिकारियों ने पुष्टि की कि अफ्फान की मौत से जुड़े सात पुलिसकर्मियों को हिरासत लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है.