Iran-America Tensions: अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर की बमों की बारिश, सात लोगों की मौत

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran-America Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रही है. इसी क्रम में अमेरिका ने ईरान पर रात भर घातक हवाई हमले किए. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में दक्षिणी ईरान के एक हवाई अड्डे, बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के रेलवे स्टेशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास दो पुलों को निशाना बनाया गया.  इस हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हैं.

ईरानी सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी ने बताया कि दक्षिण-पूर्व स्थित ईरानशहर हवाई अड्डे के आसपास तीन जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. हवाई अड्डे पर कम से कम एक अमेरिकी गोला गिरा. दक्षिणी ईरान में पुलों को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई.

बंदर अब्बास रेलवे स्टेशन पर अटैक

एक मीडिया रिपोर्ट  ने बताया कि कुछ देर पहले बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन स्टेशन को अमेरिकी हमले का निशाना बनाया गया. हमले में दो ईरानी नागरिक घायल हो गए.

होर्मुजगान प्रांत में पुलों को बनाया निशाना

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से दी गई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत में होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट दो पुलों पर हवाई हमले किए गए. इन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई और चार लोग घायल हुए हैं.

ईरानी मीडिया ने इन हमलों को अमेरिकी दुश्मन का हमला बताया है. फिलहाल, अमेरिकी पक्ष की ओर से इन हमलों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

यह हमला अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुआ है. क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल निर्यात का महत्वपूर्ण मार्ग है. यदि इस क्षेत्र में आगे तनाव बढ़ा तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है.

हमलों की निंदा करते हुए ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि यह आक्रमण अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. ईरान की सेना और सिविल डिफेंस टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और बचाव कार्य जारी है.

क्या कहा US सेंट्रल कमांड ने? 

एक बयान में US सेंट्रल कमांड ने कहा, “अमेरिकी सेना ने फाइटर जेट्स, एरियल ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए सटीक निशाना लगाने वाले हथियार दागे. इनसे ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जैसे कि तटीय निगरानी और एयर डिफेंस साइट्स, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री क्षमताएं.”

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