ईरान युद्ध ने भड़काया गुस्सा: सड़कों पर उतरे लोग, ट्रंप के खिलाफ US से यूरोप तक ‘No Kings’ बगावत

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

No Kings Protest: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रही है. अब इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. कहीं पेट्रोल और LPG की कमी हो रही है तो कहीं जमकर विरोध-प्रदर्शन हो रहा है. इजरायल और अमेरिका के ताबड़तोड़ हमलों के जवाब में ईरान द्वारा इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने से जंग अब और भी भयानक मोड़ ले चुका है. इस वैश्विक तनाव के बीच अब अमेरिका के अंदर ही विद्रोह प्रदर्शन होने शुरू हो गए हैं. शनिवार को अमेरिका में भारी भीड़ ने नो किंग्स प्रदर्शनों में भाग लिया.

नो किंग्स प्रदर्शन के बाद से अमेरिका में सियासी पारा अपने चरम पर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नो किंग्स रैलियों ने व्हाइट हाउस की चिंताओं को बढ़ा दिया है. शनिवार को अमेरिका के 3,000 से ज्यादा शहरों सहित पड़ोसी देशों कनाडा और मैक्सिको में भी लाखों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नो किंग्स गठबंधन के बैनर तले पूरे अमेरिका में विरोध की एक ऐसी लहर उठी है, जिसने ट्रंप सरकार की टेंशन बढ़ा दी हैं.

3,000 से अधिक शहरों में प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों के नो किंग्स रैलियों का असर अमेरिका के 3,000 से ज्यादा शहरों में देखने को मिला, इसके साथ ही मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों में भी प्रदर्शन किए गए. नो किंग्स रैलियों का आयोजन करने वाले लोगों का कहना है कि ट्रंप का शासन एक लोकतांत्रिक नेता के बजाय किसी ‘राजा’ जैसा होता जा रहा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है.

वॉशिंगटन डी.सी. के लिंकन मेमोरियल पर जुटी भीड़ में शामिल कैथरीन अर्नोल्ड ने राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद ड्राफ्ट डोजर यानी सेना से बचने वाले रहे हैं और हमारे बच्चों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं. वहीं मिसौरी से आईं कारिना कागान ने ईरान युद्ध को एक मूर्खतापूर्ण और अहंकारी युद्ध बताया.

वर्मोंट और मिनेसोटा जैसी जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने इमिग्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा की जा रही कार्रवाई को अमानवीय बताया है. 71 साल से अमेरिका में रह रहे मारियो डेल ओबाल्डिया ने कहा कि यह बहुत ही दुखद है कि लोगों को हर समय अपने साथ दस्तावेज साथ लेकर चलने पड़ते हैं. यह अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ है.

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

वहीं, दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की स्पोकपर्सन अबीगैल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने इसे ट्रंप डैरेंजमेंट थेरेपी सेशन यानी ट्रंप विरोधी मानसिकता बताते हुए कहा कि इन रैलियों में केवल वही पत्रकार दिलचस्पी ले रहे हैं, जिन्हें इसके लिए पैसे मिलते हैं.

अमेरिका में हुए इस प्रदर्शन में युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए. थर्ड एक्ट के संस्थापक बिल मैककिबेन ने कहा कि यह अमेरिकी इतिहास का एक बहुत ही अजीब और कठिन दौर है, जहां लोग वर्तमान शासन को फासीवाद के करीब देख रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि केवल वोट देना काफी नहीं है, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना भी जरूरी है.

तीसरी बार प्रदर्शन

आपको बता दें कि अमेरिका में हो रहा यह नो किंग्स प्रदर्शनों की तीसरा हिस्सा है. बीते वर्ष में भी दो बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए थे. इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, ईंधन की कीमतें और अर्थव्यवस्था में धीमापन जैसी समस्याएं भी कारण थीं.

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