Nor Easter Storm: इस समय अमेरिका का पूर्वी तट प्रकृति के एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी रूप का सामना कर रहा है. मिड-अटलांटिक से लेकर न्यू इंग्लैंड तक एक शक्तिशाली ‘नॉर-ईस्टर’ तूफान ने तबाही मचाई है.
इस भीषण तूफान की वजह से लगातार मूसलाधार बारिश, तेज हवाएं, खतरनाक समुद्री लहरें और भारी तटीय बाढ़ आ गई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह बे-पटरी हो गया है. मालूम हो कि ‘नॉर-ईस्टर’ एक बेहद शक्तिशाली मौसमी प्रणाली तूफान है, जो अमेरिका के पूर्वी तट के पास या उसके ऊपर विकसित होती है.
इस खतरनाक तूफान ने अमेरिका के कई राज्यों में भारी तबाही मचाई है. तूफान की वजह से गिरे पेड़ों, शाखाओं और बिजली के तारों के कारण एक समय पर 100000 से अधिक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बत्ती गुल हो गई थी. शनिवार दोपहर तक भी न्यू जर्सी, कनेक्टिकट, न्यूयॉर्क और पेंसिलवेनिया में 88000 से अधिक उपभोक्ता बिना बिजली के रहने को विवश थे.
प्रभावित हुई हवाई यातायात
विमानन डेटा कंपनी ‘फ्लाइटअवेयर’ के मुताबिक, तूफान के चलते अमेरिकी हवाई अड्डों पर करीब 425 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और 1300 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं. इसके अलावा खेलकूद के आयोजन, संगीत कार्यक्रम और कई बड़े फेस्टिवल्स भी रद करने पड़े.
सड़कों पर चल रही नावें
इतना ही नहीं, इस तबाही का असर इतना भयावह है कि न्योजर्सी और न्यूयॉर्क में बाढ़ का पानी पूरा भर गया है. इसके कारण कुछ स्थानीय लोगों को सड़कों पर आने-जाने के लिए छोटी नाव का सहारा लेना पड़ा. दूसरी तरफ न्यू जर्सी के सर्फ सिटी में घरों के अंदर पानी घुस गया है, ओशन सिटी में तेज लहरों ने समुद्र तटों का कटाव कर दिया है और वर्जीनिया के नोरफोक में पानी से भरी सड़कों पर वाहन संघर्ष करते नजर आए.
कैसे पड़ा ‘नॉर-ईस्टर‘ तूफान नाम?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि उत्तर की ओर से आने वाली ठंडी हवाओं और अटलांटिक व दक्षिण से आने वाली गर्म-नम हवाओं के बीच टकराव से यह ऊर्जा प्राप्त करता है. जैसे-जैसे यह मजबूत होता है, तट से टकराने वाली हवाएं उत्तर-पूर्व दिशा से चलती हैं, इसलिए इसे ‘नॉर-ईस्टर’ कहा जाता है.
क्यों बढ़ जाता है खतरा?
यह तूफान अपने साथ भारी बारिश, तेज हवाएं, तटीय बाढ़ और विशालकाय लहरों का खतरनाक संयोजन लेकर आता है. भारी बारिश से ड्रेनेज सिस्टम फेल हो जाता है और अंदरूनी हिस्सों में बाढ़ आ जाती है.
इसके अलावा यह विशेष तूफान इसलिए भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि तटीय इलाकों के लोगों को जल्दी राहत मिलने के बजाय लंबे समय तक तेज हवाओं, ऊंची लहरों और बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है.
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तूफान के पीछे तात्कालिक वायुमंडलीय स्थितियां, तेज हवाएं और तापमान का अंतर तो जिम्मेदार है ही, लेकिन इसके बैकग्राउंड में एक बहुत बड़ा जलवायु चक्र काम कर रहा है, जिसे ‘अल नीनो’ कहते हैं.
अल नीनो का असर को ऐसे समझिए कि अल नीनो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में एक प्राकृतिक चक्र है, जिसमें महासागर का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. इस साल का अल नीनो काफी मजबूत है.
ऐसे मिल जाता है तूफानों को बढ़ावा
पूर्वोत्तर अमेरिका के लिए अल नीनो प्रशांत जेट स्ट्रीम को दक्षिण की ओर खिसका सकता है, जो दक्षिण-पूर्वी अमेरिका के पास बनने वाले तूफानों को आवश्यक ऊर्जा और नमी प्रदान करता है. यही वजह है कि अल नीनो के वर्षों में नॉर-ईस्टर जैसे तूफान अधिक बार और तीव्रता से आते हैं.
राष्ट्रीय मौसम सेवा ने दी चेतावनी
राष्ट्रीय मौसम सेवा ने चेतावनी दी है कि यह खतरनाक मौसम अभी थमा नहीं है. अटलांटिक सिटी के उत्तर में शनिवार रात से रविवार तक सबसे ऊंचे ज्वार आने की आशंका जताई गई है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है.