पाकिस्तानः पेट्रोल-डीजल को लेकर लगी विरोध की आग, सड़कों पर उतरे ट्रांसपोर्टर

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Pakistan: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और नई पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ पाकिस्तान में विरोध की आग भड़क उठी है. माल ढुलाई से जुड़े ट्रांसपोर्टरों ने देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. ट्रक, ट्रेलर और तेल टैंकर संचालकों की हड़ताल से देश में सामान और ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. प्रदर्शनकारी ट्रांसपोर्टर डीजल की कीमत कम करने, मोटरवे टोल घटाने और विदहोल्डिंग टैक्स में राहत देने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा वे पूरे देश में एक्सल-लोड नियमों को एक समान लागू करने और 10-व्हील वाहनों को 35 टन तक माल ढोने की अनुमति देने की मांग भी कर रहे हैं.

बेनतीजा रही सरकार से बातचीत

पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के अनुसार, सरकार और ट्रांसपोर्टरों के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को बातचीत हुई, लेकिन इसमें कोई समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया. ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों, टैक्स और टोल की वजह से माल ढुलाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इससे उनके कारोबार पर दबाव बढ़ रहा है.

पेट्रोल 459 और डीजल 520 रुपये के पार

पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में हाल के महीनों में तेज बढ़ोतरी हुई है. पेट्रोल की कीमत करीब 459 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े आपूर्ति संकट को भी एक वजह बताया जा रहा है. सड़क परिवहन में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. ऐसे में डीजल महंगा होने से ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों का संचालन महंगा हो जाता है. इसका सीधा असर सामान की ढुलाई की लागत पर पड़ता है.

पेट्रोलियम लेवी का विरोध भी बड़ा मुद्दा

ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान सरकार की ओर से लगाई गई पेट्रोलियम लेवी भी विरोध का बड़ा मुद्दा बन गई है. इसके खिलाफ जमात-ए-इस्लामी ने भी देशभर में प्रदर्शन किए. कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और एबटाबाद सहित कई शहरों में रैलियां और धरने आयोजित किए गए. पार्टी प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने सरकार से पेट्रोलियम लेवी वापस लेने और ईंधन की कीमतें कम करने की मांग की. उन्होंने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि लेवी में कटौती पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को प्रभावित कर सकती है.

लंबी चली हड़ताल तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल अगर लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका असर केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं रहेगा. ट्रक और ट्रेलर देशभर में खाद्य पदार्थ, रोजमर्रा का सामान और औद्योगिक कच्चा माल पहुंचाते हैं. वहीं, तेल टैंकर पेट्रोल और डीजल को पेट्रोल पंपों और अन्य वितरण केंद्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में तेल टैंकरों की हड़ताल से ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. माल की आवाजाही रुकने से सप्लाई में देरी और परिवहन लागत बढ़ सकती है. इसका असर आगे चलकर खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

विवाद की वजह  बनी IMF की शर्तें

पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक नीतियां IMF के साथ हुए समझौतों से भी जुड़ी हुई हैं. सरकार का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए कुछ कदम आर्थिक स्थिरता और तय वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी हैं. इसी वजह से पेट्रोलियम लेवी को लेकर सरकार और विरोध कर रहे संगठनों के बीच टकराव बढ़ गया है.

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