Public Exam Bill: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही पेपर लीक कानून में अब सजा का प्रावधान और भी कठोर हो गया है. नए प्रावधान के मुताबिक, पेपर लीक के मामलों में फैसला तीन महीने के अंदर आएगा. वहीं, दोषियों को 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
प्रश्नपत्र लीक रोधी संशोधन विधेयक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा था कि यह विधेयक पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की एक कोशिश है. यह विधेयक परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता बढ़ाएगा.
काफी हंगामे के बाद लोकसभा से संशोधन विधेयक पास हुआ था. इस बिल के पास होने के बाद शिक्षा मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा था, ”लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है, जिससे परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों से निपटने के लिए एक सख्त कानूनी ढांचा तैयार होगा. सख्त सजा, त्वरित अदालत, जांच के बेहतर तौर-तरीके और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के प्रावधान वाले इस विधेयक का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक के पूरे नेटवर्क को खत्म करना और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बढ़ाना है.”
नए कानून की खास बातें
*हर राज्य में पेपर लीक के मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिन के अंदर ट्रायल पूरा कर सजा का ऐलान किया जाएगा.
*2024 के कानून में तीन से से पांच साल तक की सजा का प्रावधान था. अब पांच से दस साल तक की सजा हो सकती है.
*2024 के कानून में पेपर लीक के लिए 10 लाख का जुर्माना लगाया जाता था. अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया जाएगा.
*पहले सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच करती थी. अब पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा.
*2024 के कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच पूरी करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी, लेकिन अब नए संशोधन में दो महीने के अंदर जांच पूरी करने की बात कही गई है.

