Sheikh Hasina: शेख हसीना को वापस बांग्लादेश लाने की मांग, भारत सरकार ने दिया ये जवाब

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bangladesh News: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश छोड़कर भारत आईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने की मांग अब तेजी पकड़ती जा रही है. नई सरकार के गठन के बाद ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की बात उठा रहा है, जिससे भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं.

हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार खलीलउर र्हमान की भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया गया. इस पर भारत सरकार ने भी अपना पक्ष साफ किया है. शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बांग्लादेश की ओर से आया अनुरोध अभी विचाराधीन है. उन्होंने कहा कि यह मामला इस समय कानूनी और आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा.

भारत ने यह भी दोहराया कि वह इस विषय पर सभी पक्षों के साथ सकारात्मक बातचीत जारी रखेगा. हालांकि, सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि इस प्रक्रिया में कितना समय लग सकता है या आगे क्या कदम उठाए जाएंगे. इस बीच मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस में आयोजित इंडियन ओशियन कॉन्फ्रेंस के दौरान खलीलुर रहमान ने साफ कहा कि बांग्लादेश अपनी मांग पर कायम है. उन्होंने बताया कि तारिक रहमान की अगुवाई वाली नई सरकार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश का आरोप है कि 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ने से पहले शेख हसीना से जुड़े कुछ मामलों की जांच होनी बाकी है, इसलिए उन्हें वापस लाया जाना जरूरी है. दिल्ली दौरे के दौरान खलीलुर रहमान ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ भी अहम बैठकें कीं. इन बैठकों में दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री की संभावित भारत यात्रा पर भी चर्चा हुई.

मालूम हो कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे. देखते ही देखते ही पूरे बांग्लादेश में हिंसा भड़क गई थी. जिसके बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं. अब बांग्लादेश की नई सरकार के लिए उनका प्रत्यर्पण एक अहम सियासी मुद्दा बन गया है, जबकि भारत के सामने यह मामला कानूनी और कूटनीतिक, दोनों ही दृष्टि से जटिल बना हुआ है.

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